Saturday, September 25, 2010

''अभी तो ''बाबा'' ने नृत्य के लिए पैर उठाया है''' ......... '''.अब ! '''''डमरू बजेगा तो क्या होगा..?''

कैसा लग रहा है..?..क्या मजाक बना रखा है..अपने आपका..?
यहाँ के लोगो ने और समाज के ठेकेदारों ने.यहाँ तो सरकारी स्तर पर भगवान का मजाक उड़ाया जाता है
.यहाँ कैसा न्याय है..?..जहा पर इस देश में जन्मे उन पूर्वजो को ऐय्याश कहा जाता है,जो भगवान के नाम से लोगो / भक्तो के ह्रदय में बसता है.
क्या भगवान मर गया है..?.जब उन्होंने भगवान को सामूहिक गालियाँ दी.और उसके ना होने के हलफनामे तक अदालतों में दाखिल किये.''वह'' सब देख सुन रहा था.जो इनकी नजरो में मर गये थे.या इनके द्वारा मार दिए गये थे.
जब देश अपना ही स्वाभिमान की रक्षा ना करके,अपने सभ्यताओ के परिचय को गालियाँ भी देता है.और संसद तथा सड़को पर दावे करता है कि ''भगवान ''भी उसके साथ है..
जब -जब जिम्मेदार लोग.!.वो जिम्मेदार लोग और देश अपने ही अस्तित्व और अस्मिता के प्रतिको का अपमान करते है. और इन सबके बावजूद भी अपने साथ होने का दावा करता है.तो,भगवान के दरबार में न्याय के अनुसार ऐसे लोगो का खुलेआम बिश्व स्तर पर अपमान होता ही है.
एक बार कहा गया .कि ,'' इस देश में ''राम'' जैसा कोई हुआ ही नही.''
फिर एक बार कहा गया यहाँ की माननीय संविधान के वक्ता द्वारा द्वारा की ''कृष्ण_ राधा'' का अवैध सम्बन्ध था इसलिए एक कानून पास किया गया.एक संबैधानिक कानून बनाया गया कि , जो चाहे कृष्ण को गाली दे सके और राधा का कानूनन बलात्कार कर सके.एक कानून बनाया अपनी ऐय्यासी के लिए .अपनी वासनाओ को खुले आम ब्यक्त करने के लिए कृष्ण और राधा के चरित्र पर लांछन लगाना क्या इतना जरूरी हो गया था...?..
इन सबके बावजूद दावा करते हो कि ....
'''भगवान भी तुम्हारे साथ है.''
अपनी इन्ही आदतों के कारण मानव समाज भोगता है.अपमान और विनास।
''यहाँ निर्लज्जता की हद भी पर दी गयी.''
तुम्हारे इन दो हरकतों को राम देख रहा था और कृष्ण सुन रहा है.जिसे तुम भगवान कह कर गाली देते हो.वो सब देख सुन रहा है.
अभी पिछले कुछ महीनो से मै सन्देश ,सूचनाये और प्राकृतिक जगत में घटित हो रही घटनाओं को शब्द रूप देकर आज कल वर्तमान में ''भगवान के संसार'' में घटित हो रही गतिबिधियो को तुम्हारी भाषा में लिख दिया करता हूँ.
अब भगवान का बलात्कार ब्यक्ति या देश को, समाज या सभ्यता को तथा ठेकेदारों को नही किया जा सकेगा.सोचना ! एक बार जरुर इन सबके कर्मो का परिणाम आम जनता को भोगना पड़ता है.देश का अपमान होता है.जन्म भूमि का अपमान होता है ,मात्री भूमि पर कलंक लगता है.सारे जगत में इनके कारण.
..परिणाम आने चालू हो गये हैं.
.भगवान ने अपने जगत में अपने ही अंदाज में बोलना प्रारंभ कर दिया है..
अरे अभागो..!..तुम्हारे भगवान ने बोलना चालू कर दिया है.
जिन्दा कर दिया है मैंने तुम्हारे भगवान को..
''भगवान '' तुम्हारा अपना परिचय देने लगा है.तुम्हारा दुर्भाग्य है कि आज तुम अपने ही भगवान को नही पहचान पा रहे हो.
अच्छा ! तुम्हारे अभागे पन का इतिहास काफी पुराना है.तुम्हारा स्वार्थ पूरा होता है.तुम्हारे भोग के संसाधन पुरे होते रहे.बस इसी चाह में वो सारे नपुंसक ज्ञानी लोग चुपचाप तमाशा देखते हैं.अपना ब्यापार ,अपना धंधा,अपना संसार ,अपनी राजनीती और अपने अहंकार के लिए इस देश में यहाँ के आराध्य का खुलेआम बलात्कार देख कर किसी हिजड़े की तरह मुस्कराते रहे सभी.भक्त ,अनुयायी ,धार्मिक और अध्यात्मिक और यहाँ तक की अपने को खुद भगवान होने का दावा करने वाले महान लोग भी एक कायर और नपुंसक की भांति चुप रहे...भाव था तुम सबका कि.....
''मुझे क्या परेशानी है.मुझको तो नही कहा गया ना.''
और एक तरफ रुक -रुक कर भगवान को गाली दिए जाते रहे लगातार.एक के बाद एक,फिर उन्ही लोगो द्वारा दावा किया जाता रहा कि
''भगवान भी मेरे साथ है.''
और सारा संसद / अधिकारी और जनता मस्त .
मै बोलूँगा तो मेरी हत्याए कर दोगे तुम .मेरा अपमान तो करते ही हो तुम सब.जब भी तेरी इक्षा होती है.
भगवान अभी मरा नही है.इस धरती पर सशरीर उपस्थित होकर अपना प्रमाण दे रहा है.अपने शक्ति प्रदर्शन द्वारा.
''जाग्रत त्रिकोण ,सक्रिय और क्रियाशील होकर चल फिर रहा है.''
''बाबा की समाधि टूट गयी है.शक्तिया मुक्त होकर विचरण कर रही हैं.''
..शक्तियों के चलने फिरने से धरती में कम्पन बढ़ रहा है.जिससे तत्वों में टकराहट बढ़ रहा है.
हमे तुम्हारे द्वारा दिए गये तुक्ष सम्मान की चाह नही.
..हम भगवान / बिधाता / परमात्मा ''बाबा '' के सगे पुत्र हैं.
.हमने अपनी माँ कामख्या / शक्ति /करेंट के गर्भ से जन्म ले लिया है.
देखते रहो..
2006 के बाद से बढ़ रहे प्राकृतिक हलचलों को.हमने जो ट्राइंगल बनाया है,उसका प्रभाव और उसमे हो रहे बिस्फोट से जगत में तत्वों में बिस्फोट हो रहा है.डांवाडोल हो रहे धरती को हम अपने पैरो से दबाये हुए हैं.
'''भारत की रक्षा ये नपुंसक क्या करेंगे...?''
हमने भारत की उत्तर और पश्चिम उत्तर सीमा के उस पार अपना प्रहार बढ़ा दिया है.
''हिमालय के उस तरफ प्रकृति में कुछ हो रहा है.असुर तत्वों को हमने घेर लिया है.''
भारत की प्राकृतिक सीमा में होने से हम प्राकृतिक रूप से इस देश की रक्षा कर रहे हैं.तुम अपना प्रदर्शन कर रहे हो.
और ''मै'' अपना ''अघोर प्रदर्शन '' कर रहा हूँ..
''
'अकल्पित और अकल्पनीय प्रदर्शन.''
बोलो ! कैसा चाहिए तुम्हारे भगवान का प्रदर्शन ...?..
वैसा ही कर देता हूँ.मेरे पास भिखारियों की जरूरत नही है.नपुन्सको की भीड़ दूर ही रहे...
मैंने असुरो को घेर लिया है...ब्यक्ति हो या देश..कोई भी ''भगवान'' के नाम पर अब बलात्कार ना कर सकेगा.क्या कोई दूसरा देश उदहारण है तुम्हारे पास जो अपने ही आराध्य ,अपने ही पहचान और अपने ही अस्तित्व ,अपनी ही शक्ति का अपमान और बलात्कार करता हो...?...
त्राहि-त्राहि मचना शुरू हो गया है.अभी तो यह शुरुआत है.तुम्हारे परमात्मा द्वारा कलयुग का संहार शुरू हो गया है.
कलयुग के अंत की प्रक्रिया प्रारंभ हो गयी है.
छेड़ छाड़ ठीक नही है.पहले ही कहा जा चूका है .की,
''अघोर शिवपुत्र से छेड़ छाड़ ठीक नही है.''
मेरा अपमान करना,मजाक उड़ाना बहुत सरल हो सकता है.पर उसके बाद का परिणाम स्वतंत्र और मुक्त शक्तियों द्वारा दिए गये उत्तर को सम्हालना बहुत भारी पड़ जाता है..
मै एक साधारण सामान्य मानव शरीर धारी ब्यक्ति मात्र हूँ.मै इस जगत,तुम्हारे जगत को समाचार दे रहा हूँ.
'' जाग्रत त्रिकोण'' कभी भी अपने संचालक और नियंत्रण कर्ता का अपमान बर्दास्त नही करता.''
''काशी से त्रिशूल मुक्त है.कामख्या के रूप और शक्तिया मुक्त हैं.जगन्नाथ स्वामी और बद्रीनाथ जी मुक्त हैं.
हिमालय से एक वर्स हो गये बद्रीनाथ जी को हटे हुए.15 अगस्त 2009 को लाया था मै अपने साथ.
15 अगस्त 2010 से हिमालय के क्षेत्र में प्राकृतिक समाचार देख लो.
एक साल पूरा होने के शुभ अवसर पर यह ''जगत के पटल पर अघोर बाल शिवपुत्र द्वरा प्रस्तुत कार्यक्रम कैसा लगा.''''
..यह अभी तक नही बताया आपने..
ब्लॉग में दिए गये ट्राइंगल को सदा ही देखते रहिये .पिछले संदेशो के अनुसार परिणाम अगर ठीक से ना आ रहा हो तो,मुझसे शिकायत कीजिये और फिर समझ बुझ कर ही गाली दीजिये.
यह मेरा दावा है, की , आपको कोई मौका नही दिया जायेगा शिकायत का.
उम्मीद है..कार्यक्रम __बहुप्रतीक्षित और अत्यंत रोमांचकारी यह कार्यक्रम आपको प्रिय और रुचिकर लगा होगा.
सावधान होकर ''शिवपुत्र शरणम गच्छामि '' के भाव से ..
''अघोर शिवपुत्र का ध्यान करे.''
अघोर शिवपुत्र का सदा स्मरण करते रहे.
'''प्रलय खंड में बिध्वंस होता है''.
जल्द ही कुछ दिनों के लिए एक छोटे से कार्य के लिए दिल्ली से बाहर जाऊंगा.
...देखता हूँ क्या होता है..???
''भारत सहित अमेरिका ( मित्र देशो सहित ) >>पाकिस्तान तथा चीन ( धरती के भीतर मेरे द्वारा बनायीं गयी अधोमुखी त्रिकोण )पर अपनी नजरे जमाये रहे.कोई चाहे या ना चाहे.
..कोई माने या ना माने.
विराट स्तर पर घटनाये आप सभी के सामने ''परोस'' दी जाएँगी..,इस जगत में.''
आपके ''भगवान '' को हम असमय नही मरने देंगे.
''भगवान ''जाग गया है.जाग्रत भगवान का परिचय पुराणों और अपने धर्म शास्त्रों में पढ़ते रहो या फिर उन्ही में खोज लो..
एक सामान्य ब्यक्ति द्वारा संदेषित और सूचित यह ब्लॉग आपके भगवान और उनसे सम्बंधित कार्यक्रमों की ताजा जानकारियों से भरा रहेगा.यह मै पूरी कोशिश करुंगा....
''सावधान''
''अपने ही देश की आत्मा का बलात्कार मत करो .''
अन्यथा ..! धरती में घटित घटनाओ की रफतार बढ़ जाएगी और अभी तो कम है आगे त्राहि _त्राहि बढती जाएगी.
हम सम्हाल रहे हैं अभी.तुम्हारी धरती को.
हम सजा रहे हैं.. तुम्हारी प्रकृति को....
'''बिधाता के बिधान के अनुसार'''
आप सभी को मेरा बहुत सारा प्यार .क्या करू सभी अपने ही तो हैं ना.
ध्यान पूर्वक धरती पर स्थित [ भारत में ] उर्ध्मुखी जाग्रत त्रिकोण ''केदारनाथ >>काशी>>दिल्ली पर अपनी नज़ारे जमाये रहिये..
और अमेरिका [ आदि ] >>चीन >>पाकिस्तान ''अधोमुखी त्रिकोण [धरती के नीचे '.' ] पर अपना ध्यान रखे रहिये...समाचार चालू है.
रोमांचकता और घटनाये बढती ही जाएँगी .अभी तो तुम्हारे भगवान का खेल शुरू ही हुआ है.
समाचार हम भेजते रहेंगे,समय- समय पर,आप सबके पास.लापरवाह ना हो.सब कुछ भूल कर एक बार ध्यान से अध्ययन करे पिछली घटनाओ की.हम आपके लिए ही तो यह सब कुछ कर रहे हैं.
''बाबा '' ने ,मेरे ''पिता श्री'' ने एक '''नई रचना'' करने एक लिए बोला है.
'' हम विकृत प्रकृति को मूल प्रकृति में पुन: स्थापित करने के लिए प्रकृति को सजा रहे हैं.प्रकृति में परिवर्तन कर रहे हैं.''
''जगत की भलाई के लिए ''भगवान का मजाक उड़ाना और अपमान करना ठीक नही है.''
अपनी औकात लगाने और दिखाने के बाद बोलते हो, कि,' भगवान तुम्हारे साथ है'.अब यह सब ठीक नही है.अब यह सब नही चलेगा.
''भगवान देखता ,सुनता है,सहता है ,तो,उत्तर भी देना जानता है.''
भगवान जब उत्तर देता है तो ब्यक्ति ,देश,समाज,सभ्यता और परम्पराए तो छोडो.युग भी बदल जाता है.''
कौन रोकेगा ..???..इस महा वेग को..
''शास्त्र में बाबा के ''अघोर'' रूप के कुछ स्थानों पर ''लक्षण'' लिखा हुआ है'''
मै तो फिर भी एक साधारण मानव हूँ.प्रथम मानव शरीर धारी ''अघोर''..
पहचाने ''मै'' कौन हूँ...???...

( कि, अभी भी नही )
.....कोई बात नही .सावधान रहो.क्या जल्दी है.
..
..आगे अभी और भी कार्यक्रम प्रस्तुत है.
Please email your opinion in Hindi using English font to shivputra_ekmission@yahoo.co.in

Wednesday, September 1, 2010

....'' परमात्मा ''बाबा_ शिव जी ....मेरे पिता जी की .....''समाधी'' भंग होने से तांडव प्रारंभ हो गया है.''''

..और जैसा की मैंने बोला था कि उत्तर और उत्तर पश्चिम दिशा से बाबा के दो रूप वापस नीचे यहाँ मेरे पास आ गये थे.और उत्तर से एक प्रहार आया था भारत की ओर,जिसे मैंने भारतीय सीमा पर ही रोक दिया था.उत्तर में सीमा पर कुछ हो रहा था.परन्तु आधुनिक संचार माध्यमो से आने वाले समाचार का मै इंतजार कर रहा था.पिछले महीने में प्राप्त समाचार से पता चला कि हिमालय के उत्तर सीमा के पास ''भयानक ''जल प्रलय '' चीन ''में हुआ...तथा उत्तर पश्चिम और पश्चिम सीमा के पार के देश ''पाकिस्तान'' में भी भयानक ''जल प्रलय'' हुआ है...
.....हमने बोला था ना कि हमने जो ''अधोमुखी त्रिकोण'' '.' धरती के नीचे बनाया है,उससे पाकिस्तान __चीन रेखा पर भयानक दबाव पड़ा .जब मै अपने ''जाग्रत ट्राइंगल'' पर दिल्ली से बाहर काशी से अपना शक्ति त्रिशूल लाने गया था....
....जैसा कि पहले ही बताया जा चूका है कि
मेरे दिल्ली से बाहर जाने पर इन क्षेत्र में धरती का संतुलन में फर्क आएगा.धरती में कम्पन बढ़ता है,मेरे चलने फिरने से,प्रकृति में परिवर्तन में तीव्रता आती है.... ........तत्वों में जैसे धरती ..जल ...और अग्नि...तथा वायु तत्वों में भयानक रूप से टकराहट बढ़ जाता है.जो प्राकृतिक आपदा के रूप में जगत के सामने प्रकट होता है...
....आज -01सेप्तम्बर 2010 को श्री कृष्ण जन्मास्टमी है....
....आज ही के दिन पिछले साल केदार नाथ जी से वापस आते समय उखी मठ में मुझे जहर की रोटी खिला कर मेरी हत्या करने का कोशिश किया गया था.'....

'''मै''' मर गया था,
''देव प्रयाग '' [उत्तरा खंड --हिमालय] में थोडा देर के लिए.उस समय मेरे दो शिष्य और मेरी बेटी भी मेरे साथ थी.दोनों शिष्य डाक्टर थे.मेरी बेटी और दोनों शिष्यों ने अपने पिता / गुरु को अपनी आँखों से मरते हुए देखा है..20 -=40 मिनट तक मृत्यु में रहने के पश्चात फिर मैंने अपने ही मृत शरीर में ''स्व काया'' [ परकाया ]प्रवेश किया ..और मेरा मरा हुआ स्थूल शरीर पुनः जी उठा.....
.......अतः आप कह सकते हैं कि ,आज के दिन ही असुरो ने पिछले वर्ष मुझे मार डाला .पर मै ''बाबा'' भगवान शिव ,अपने पिता श्री के कार्य को पूरा करने के लिए फिर से जी उठा.अतः आज मुझे एक नया जन्म मिला.शिवपुत्र शुकदेव चैतन्य की हत्या कर दी गयी और
उस शरीर में ''अघोर'जन्मा.....जिसको ''बाबा'' की धारणाओं के अनुसार अपना काम पूरा करना था.;;
'''.एक ऐसा अघोर जो अपना कार्य,प्रकृति का परिवर्तन का कार्य ,धरती कि रक्षा और संतुलन का कार्य तथा नियंत्रण किसी भी हद तक जाकर करता है...

....
पिछले एक साल से सारे जगत में,धरती पर,प्रकृति में हो रहे घटनाएँ मेरे ''अघोर लीला '' का प्रदर्शित साकार कार्यक्रम है...
...मेरी मृत्यु की चाह से किये गये प्रयास से''' मेरी मातायें'' उग्र' हो गयी हैं..कोई माँ अपने पुत्र कि हत्या कैसे सहन कर सकती है...?...
एक वर्ष में 01 -sep 2009 से 01 sep 2010 तक के अन्तराल में तत्वों का प्रकोप उग्रता तथा आक्रोश में किया गया कार्य ,जो विकृत प्रकृति में सुधार के लिए किया गया है....आप सभी के सामने है...यह थमने वाला नही...
....क्योकि आज मानव सभ्यता अपने अहंकार में किये गये अविवेकी और आसुरिक कर्मो के कारण आत्म हत्या के कगार पर जगत को पहुंचा रहा है......
.
..मै धरती की रक्षा कर रहा हूँ.भारत को प्राकृतिक आपदाओं से बचा रहा हूँ. ..धरती पर प्रलय खंड प्रारंभ हो चूका है.बार- बार सुचना और सन्देश दे रहा हूँ..
..प्रलय में बिध्वंस होता है.यह बिध्वंस प्रकृति के मूल तत्वों और शक्तियों के आपसी टकराहट ,आकर्षण तथा विकर्षण के बिध्वन्सक परिणाम से प्रलय होता है.और यह सब प्रारंभ हो चूका है..
.सारे जगत में धरती पर हर एक देश में घटनाएँ घटित हो रहा है...
.....ये असुर इन घटनाओ के मूल कारण हैं....
....अभी तो यह शुरुआत भर है.प्रकृति में बिध्वन्सक घटनाएँ बढ़ती ही जाएँगी..
.क्योकि मै मूल शक्तियों को मुक्त कराता जा रहा हूँ.धरती की रक्षा के लिए
.जगत की भौगोलिक संरचना में परिवर्तन होगा ही होगा.युग का परिवर्तन हो रहा है. ''कलयुग के अंत का कार्य क्रम '' आपके सामने प्रस्तुत है....
...
....एक साल का कार्य क्रम प्रस्तुत है...
..एक
'''चेतावनी ''पुनः दे रहा हूँ.आसुरिक और बुद्धिजीवी जगत को...
...मेरे चलने फिरने से धरती में कम्पन बढ़ जाता है और प्रकृति में परिवर्तन तेजी से होता है ..
मातायें अपने पुत्र पर हो रहे आघात से उग्र हो रही हैं.शक्तियों का क्रोध बढ़ता ही जा रहा है....
.
.दुर्गाशप्त्पदी.....पुस्तक में आपने पढ़ा है.आप सबने .अब अपने जीवन में इसी वर्तमान में इस धरती पर घटित होते हुए भी देखिये.अभी सभ्यता,मानव चेतना बेहोश है.जबकि आज का धर्म ,आज का अध्यात्म और साइंस अपने चरमोत्कर्ष पर है.
..फिर भी प्रकृति अनियंत्रित है इनके लिए........
...
मै नियंत्रित करने का और ठीक ढंग से संचालित करने का प्रयास कर रहा हूँ.धरती को बचाना मेरा काम है..
.धरती के जीवों और आत्माओ को अपने आपको बचाने के लिए
अब खुद ''पुरुषार्थ करना होगा.'
'''अघोर शिवपुत्र '' को ईमानदारी से स्वीकार कर ध्यान करना ही होगा..शेष.आगे .......
.....जीवन में मर्जी आपकी......

.
.जब युग परिवर्तन में प्रलयंकारी घटना होता है तो अनेकानेको का बिध्वंस होता है.
..इस समय असुरो से भयानक युद्ध चल रहा है.मेरे पिता श्री परमात्मा भगवान ''शिव जी'' कि समाधि टूट गयी है.
..मातायें अपना विस्तार कर प्रदर्शन कर रही है...
..जगत में ''पगध्वनि गूंज रही है....
'''तांडव नृत्य'' का मनमोहक थाप सुनाई देने लगा है...
एक बार फिर ....
....''अघोर शिवपुत्र '' जितना चिंतित रहेगा,जगत में उतना ही तेजी और तीव्रता के साथ प्रलय में बिध्वन्सात्मक कार्यक्रम जगत में ,प्रकृति में प्रस्तुत होता रहेगा..
इसलिए ''अघोर शिवपुत्र '' से छेड़ छाड़ ठीक नही...

.......यह ''शब्द ''मात्र नही जो ब्लॉग में लिख कर ,अपना प्रचार किया जाये.यह ! हर ''शब्द जीवंत'' है और जीवित शब्द ,जाग्रत शब्द ,जाग्रत ट्राइंगल में बिस्फोट के परिणाम स्वरुप क्रियाशील और जीवंत है.कोई जल्द बाजी नही ,कोई घबराहट नही.हमे.
हम जगत को बचा रहे हैं....
प्रकृति अब मेरे इक्षा व् आदेशानुसार चलने लगी है... धीरे -धीरे प्रकृति पर मेरा नियंत्रण कायम होता जा रहा है....
..
भारत की सुरक्षा और भारत के शक्ति प्रदर्शन के लिए ''मै'' शत्रु देशो को अपनी प्रकृति में समेट रहा हूँ. ब्यक्ति हो या देश ! ...मैंने सभी को घेर कर अपने आगोश में ले लिया है.
''असुर तत्वों'' का सर्वनाश करना शिवपुत्र एक मिशन का प्राकृतिक जिम्मेदारी और कार्य है.
अपना-अपना जीवन जीते हुए देखते रहिये.प्रकृति में परिवर्तित हो रहे घटनाक्रम को..
एक साल का जगत में प्रस्तुत ''बाल अघोर'' का ''लीला__कार्य क्रम '' कैसा लगा..जरुर लिखें.
आप सभी का अपना रक्षक.. आप सभी को मेरे मृत्यु / जन्म के एक साल पूरा होने पर बहुत सारा प्यार.......
........................
'''''अघोर शिवपुत्र''''''''......................
....जन्म और मृत्यु पर अधिकार तो सिर्फ मेरे पिता श्री ''बाबा '' का है...
....कब ,किसको और क्यों ,कहाँ पर किसलिए जन्म लेने देना है और शरीर का अंत कर देना है....
.यह ''बिधाता'' का , ''बाबा '' का 'क्षेत्र 'है..
....
..सावधान.......
.....................इसलिए कर रहा हूँ.क्योकि उनका बेटा पिछले साल उनके पास,उनके घर से ही ,केदार नाथ से ही वापस आ रहा था..
मै जाग्रत त्रिकोण के एक सिरे केदारनाथ जी के यहाँ से चलकर वापस दिल्ली के लिए यात्रा कर रहा था.उसी यात्रा में अति सम्मान के साथ पुजारी ने अपने घर पर बुलाया और घर ले जाकर खाना में ''जहर की रोटी'' खिलाया.इस धारणा के साथ कि मै रास्ते में ही मर जाऊंगा.....
...
..बात मेरे मृत्यु की नही है और जन्म की भी नही है.
..बात सिर्फ यह है कि,यह घटना हुयी है.और जब कोई घटना मनुष्य द्वारा जानबूझ कर की जाती है,तो उस घटना का परिणाम भी जगत को भुगतना पड़ता है
.बाबा ने अपने पुत्र को भेजा है.संसार को बचाने और असुरो का सर्वनाश करने के लिए.तो असुरों का अपना स्वभाव है ,वो तो होगा ही.वो तो अपने स्वभाव अनुसार करेंगे ही.असुरो का स्वभाव ही होता है,अपने भोग वासना और स्वार्थ ,वैभव की प्राप्ति के लिए मार काट और छल करना...असुर किसी के हो ही नही सकते...उनका अपनापन सिर्फ अपनी स्वार्थ पूर्ति और भोग की पूर्ति तक ही सिमित रहता है.पर यह तो निर्विवाद सत्य है कि ,अंत उनका होता ही है....
...सामूहिक बिध्वंस तो असुरो का ही होता है और वह बिध्वंस वीभत्स होता है.....
.
जिसे युग याद करते है...और यह युग परिवर्तन का काळ खंड चल रहा है.
....अपने ''पुत्र'' के साथ यह हो रहे जगत में बर्ताव देख कर ''बाबा'' का समाधि टूट गया है.
परमात्मा अब दंडात्मक मुड में हैं...
.
..बाबा के समाधि टूटने से शक्तियां उग्र हो रही है..
.शक्तियों की उग्रता से प्रकृति मूल तत्वों में उग्रता ,आक्रोश और क्रोध बढ़ रहा है.....
...अभी भी मानव सभ्यता बेहोश है...

.''जल प्रलय''........''अग्नि का प्रकोप और प्रलय''.. तथा ''वायु का प्रहार'' बढ़ता ही जा रहा है.
...धरती जगह -जगह से फट रही है..
आसाम व् बंगाल से मुक्त व् स्वतंत्र करायी गयी मातायें ,शक्तियां,महाबिध्यायें..धरती पर चारो तरफ दशो दिशाओं में विचरण कर रही है
.इनके चलने फिरने से धरती के अन्दर और बाहर कम्पन बढ़ रहा है.जिससे एक संगीत ,एक पगध्वनि उत्पन्न हो रही है. .इस मनोरम संगीत और नृत्य को जगत के शास्त्रों में '''तांडव ''' के नाम से कहा गया है.
..इस ''तांडव नृत्य'' को जगत में उपस्थित सभी देवता ,देविया और दिब्य / साधारण सभी आत्माएं हतप्रभ और अवाक् हो ,स्तंभित हो कर देख रहे हैं.
सभी प्रलय के साक्षी बन रहे हैं.

''बहु प्रतीक्षित 'प्रलय' प्रारंभ हो चुक है.
परन्तु ''अभागा मानव'' अभी भी अपने अहंकार में तथा अपने भोग में बेहोश कर लिप्त अपना जीवन ढो रहा है...
....तो फिर चिंता ही किस बात कि है.....?...
...सभी को अपना -अपना कर्म भोगना ही पड़ता है.
परमात्मा ने '''न्याय और दंड '' के बिधान अनुसार अपनी उपस्थिति के प्रमाण का प्रदर्शन प्रारंभ कर दिया है....
आधुनिक साइंस अगर सम्हाल सकता है तो सम्हाल ले...
............फिल हाल ''मै'' पुनः एक बार दिल्ली से बाहर निकलने कि तैयारी कर रहा हूँ.स्वास्थ स्थूल शरीर का ठीक नही है.
फिर भी कार्य तो करना ही है ना..
...मिशन का काम पूरा किये बिना आराम कहाँ...????
..धरती के 'इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फिल्ड' को फिर चेक करने के लिए,इस धरती पर मुझे चलना फिरना तो पड़ेगा ही ना...
ध्यान रहे..
.जाग्रत ट्राइंगल में बिस्फोट बढ़ता ही जा रहा है...
चीन --पाकिस्तान के बाद अब अमेरिका का तथा उनके मित्र देखो को भी समेटने की बारी का प्रारंभ हो चूका है.
देखते हैं आधुनिक बिज्ञान कैसा समाचार पहुंचता है मुझ तक टी. वी के माध्यम से ,संचार माध्यम से .....
आप माने या ना माने ...आपकी मर्जी .....
....कहाँ समय है कि, मनवाया जाये और क्यों.......?
अगर कोई अभी नही मानेगा तो क्या फर्क पड़ता है....?
प्रकृति में प्रलय खंड में बिध्वंस का कार्य क्रम बिधाता द्वारा प्रस्तुत है .देखते रहिये और यह देखना ,जीव और आत्मा की विवशता है.क्योकि अपने -अपने अहंकार में सभी विवश हैं....
मनुष्य का मतलब ही है की ,कुछ भी हो जाये,मानेगा ही नही.
वही तो असुर है..मानव नही.....
------------------------------------------------------------------------------------

Please email your opinion in Hindi using English font to shivputra_ekmission@yahoo.co.in

Monday, August 2, 2010

....''प्रकृति में ''मूल तत्वों'' का प्रकोप,उग्रता और प्रहार बढ़ रहा है''...

.''...........और हम लोग { मै, रूचि और कुमार } काशी क्षेत्र में -मऊ से अपना त्रिशूल लेने चल दिए.
हम अपने ही जाग्रत त्रिकोण के एक अन्य एंगल [ कोण ]की ओर यात्रा पर चल दिए.मौसम बिज्ञान की भविष्यवाणियाँ फेल हो रही थी.प्रकृति में परिवर्तन करने के लिए मै शक्तियों के साथ दिल्ली से काशी के लिए निकल चला था.
मुझे बंधन में पड़े हुए अपने ''बाबा '' के त्रिशूल को मुक्त करना था.और धरती के बिध्युतिया मैग्नेटिक फिल्ड को भी चेक करना था....लम्बे सूखे के बाद भयानक बारिश प्रारंभ हो चूका था. रात भर चलता रहा पुरे रास्ते,इलाहाबाद तक ...इलाहाबाद से थोडा रास्ते तक ही बारिस थी.आगे सारे रास्ते एक दम सुखा पड़ा हुआ था. दुसरे दिन शाम को हम लोग कार द्वारा मऊ पहुंचे और अपने घर से अपनी { बाबा की अपनी शक्ति} त्रिशूल को लेकर वापस दिल्ली की ओर चल पड़े. ०९ जुलाई की शाम को रात दस १० बजे.. ........
09 / 10 दस तारीख को प्रातः {रात में } 2 am पर NH -2 पर हमारी कार का एक्सीडेंट हो गया..
कार बुरी तरह छति ग्रस्त हो गया.हम तीनो लोगो को जरा सा भी चोट नही आया.बस हल्का सा दीदी को और कुमार को लगा....
........
हम पर सेकण्ड खंड का भयानक हमला हुआ था.
...
हम त्रिशूल लेकर काशी क्षेत्र से बाहर निकल रहे थे.
..सेकण्ड खंड के सामूहिक और छल से किये गये प्रहार से हम सुरक्षित बच गये थे..पर मेरा पुत्र समान कार बुरी तरह छतिग्रस्त हो गया .......
...
.....जबसे हमने माँ कामख्या और दसो माँ के रूपों को आसाम से मुक्त करा कर सुप्त पड़े हुए अधोमुखी त्रिकोण को जाग्रत परिवर्तित कर उर्ध्मुखी त्रिकोण के रूप में स्थापित किया है.प्रकृति में परिवर्तन तभी से प्रारंभ हो गया है.अब प्राकृतिक शक्तिया अपना स्थान परिवर्तन करने लगी हैं.
.........पिछले साल 01 सेप्टेम्बर 2009 को केदार नाथ से निचे आते समय ऊखी मठ [ उत्तराखंड ] में पुजारी के यहाँ खाने में मुझे जहर की रोटी खिलाई गयी थी.तो
धरती की प्रकृति में तत्वों में आपसी टकराहट तथा उग्रता बढ़ गयी थी.मेरी माताये जो मूल तत्वों के द्वारा प्रकृति की आधार भुत शक्तिया हैं.उन्होंने जगत में अपनी उग्रता ब्यक्त करनी प्रारंभ कर दिया था.जहर के परिणाम से मेरे शरीर में बिस्फोट हो रहा था और मेरे अस्तित्व में स्थित चक्रों में उस बिस्फोट से तत्वों में बिस्फोट होने लगा था.
''
''''मेरे शरीरस्थ चक्र अपने विराट अस्तित्व में मेरे पिता श्री ''बाबा जी ''परमात्मा शिव के साथ सतत युक्त होने से मेरे चक्रों की किसी भी क्रिया का असर प्रकृति में होने लगता है.''

...प्रक्रति तत्वों द्वारा ब्यक्त होता है .यह तत्व ही जगत के मूल आधार है जिससे दृश्य और सम्पूर्ण जगत साकार होकर ब्यक्त होता है...
.अतः ,
मेरे चक्रों में बिस्फोट के परिणाम स्वरुप .....
............
..पृथ्वी तत्व .......
..............जल तत्व .......
...............अग्नि तत्व और वायु तत्व उग्र हो कर धरती पर तांडव करने लगे .जिसके संतुलन के लिए मुझे अपने वर्तमान स्थान दिल्ली से पश्चिम गुजरात की तरफ जाना पड़ा.और मेरे जाते ही दिल्ली में एक सप्ताह के अन्दर ४ / ५ भूकंप के झटके आये.जैसा की मैंने किसी स्थान पर बतलाया है कि मेरे चलने से धरती में कम्पन बढ़ जाता है और प्रकृति में परिवर्तन की प्रक्रिया बढ़ जाती है....और फिर मुझे इंदौर से होकर बोम्बे जाना पड़ा ..क्योकि संतुलन के इस खेल में जल तत्व का भयानक हमला भारत के समुद्री क्षेत्र से महारास्ट्र और गुजरात पर होने वाला है.. मेरे उधर जाने से सब कुछ शांत हो जाता है...और आधुनिक बिज्ञान की मौसम के प्रति की गयी भविष्य वाणियाँ और अनुमान फेल हो जाती है.
उसके बाद दिसंबर २००९ और जनवरी २०१० में मैंने '''माँ कामख्या '' की तिन मूल शक्तियों...... ''माँ काली...माँ तारा ....और ...माँ छिन्नमस्ता '' को भी मुक्त करा लिया.....
...
.......अब इस घटना से जो 09 / 10 जुलाई को NH -- 2 पर ,रात 2 बजे, 2nd खंड का हमला हमारे ऊपर हुआ.
उ
सके परिणाम स्वरुप प्रकृति के मूल तत्व उग्र हो रहे है और सारी धरती पर अपनी उग्रता का प्रदर्शन करने लगे है....

.
..चुकी मै अपने ही जाग्रत त्रिकोण के समानांतर मार्ग पर यात्रा कर रहा था,इसलिए इसका दबाव धरती के निचे निर्मित अधोमुखी त्रिकोण पर पड़ेगा और इससे सम्बंधित ''''चीन .....पाकिस्तान......अमेरिका [ आदि ] देशो सहित सारे धरती पर तत्वों के क्रोध का ,तत्वों की उग्रता का प्रदर्शन होना प्रारंभ हो गया है...
........जैसा की पिछले साल से ही हो रहा है.अब यह सारी धरती पर बढ़ता ही जा रहा है.
.....
ऐसा ही परमात्मा का आदेश है..माताएं इस तरह की आघातों को सहन नही करेंगी इससे शक्तियों में उग्रता बढेगा ही बढेगा...
...जब जिस तत्व की प्रधानता होगी ,उस तत्व की उग्रता और प्रहारकता इस प्रकृति में धरती पर चारो तरफ प्रकट होगी.यह प्रकृति में परिवर्तन का ही हिस्सा है.....जैसे .....
...............
..बरसात में जल तत्व ,भयानक और उग्र प्रदर्शन करते हुए प्रहारक भाव में आएगी...
.....
.गर्मी के दिनों में ....अग्नि तत्व अपना उग्र प्रदर्शन करते हुए अपनी जीवन्तता का आभास कराएगा.ताप और गर्मी तथा भीषण अग्नि के द्वारा अपना क्रोध ''सूर्य '' प्रदर्शित करेगा...
.ऐसे ही जाड़े के दिनों में धरती को अपनी वायु और जल के घोर प्रदर्शन का सामना करना ही पड़ेगा.बर्फबारी,हिमपात और अति वृष्टि से ठंडक हाहाकार फैलाएगा...
पिछले ३-४ साल से समुद्र धरती पर प्रहार कर रहा है,जिससे भारत की रक्षा तो मै ही कर रहा हूँ.
सेकण्ड खंड के इस तरह से किसी भी हरकत का जो मेरे ऊपर घात के रूप में होगा,उसके बदले में मेरी माताएं ,ये मुक्त व् स्वतंत्र शक्तिया उग्रता से अपनी पग ध्वनि इस जगत में प्रमाणित करेंगी....
यह संसार के मानव समाज के जीवन में बिध्वंस , तत्वों के विघटन और आपसी टकराहट के रूप में बढ़ता ही जा रहा है.
फिर भी मै धरती को बचाने की कोशिश कर रहा हूँ.
.......बहुत जल्द ही मै इस जाग्रत त्रिकोण के क्रियाशीलता और और स्थान परिवर्तन के फल स्वरुप उत्पन्न स्थितियों के जाँच परख के लिए फिर जल्द ही दिल्ली से बाहर निकलूँगा.देखता हूँ कि क्या होता है...?
मेरे दिल्ली से बाहर जाने पर.धरती पर मेरे चलने फिरने से प्रकृति में परिवर्तन होता है. और धरती का केंद्रीय संतुलन प्रभावित होता है.
..
.....''पाकिस्तान ---चीन -----अमेरिका {मित्र देशो सहित } सारे धरती की प्रकृति में प्राकृतिक मूल तत्वों के प्रदर्शन का आप हम सभी साक्षी और गवाह बन रहे है.देखते रहिये........
............
.यह मजाक का विषय नही है.बल्कि होश में आने का समय है...
.....
...प्रथम मानव शरीर धारी अघोर का कार्य प्रारंभ हो चूका है...
......
.यही माताओ ,मूल शक्तियों का मूल प्रमाण भी है....
....यही प्रमाण तो जगत मांगता है,बार- बार मुझसे.

मेरे शरीर में या शरीर पर जब भी आघात होगा तो धरती पर प्रकृति में भी आघात ,बिस्फोट और बिध्वंस होगा.
पिछले वर्सो से यह प्रमाणित होता ही जा रहा है.यह लगातार बढ़ता ही जा रहा है.
........सेकण्ड खंड सुधरने के लिए तैयार नही है और इन्हे सुधरने और समझाने के लिए शिवपुत्र के पास समय नही है.
हमे धरती को बचाना है भले ही 2nd खंड के शरीरधारियो को कठोरता से दमित ही क्यों न करना पड़े...
विशेष .......
......................लगभग 8 -10 दिनों पूर्व ..
....''बाबा'' का दो रूप [शरीर ] हिमालय से वापस यहाँ निचे आ गया है...एक उत्तर पश्चिमी भारतीय सीमा ,अमरनाथ जी की तरफ से.दूसरा भारत के उत्तर हिमालय कैलाश की ओर से ....
.....चीन की ओर से कुछ प्रहार आ रहा था.जिसे भारतीय सीमा पर हिमालय के उस तरफ ही रोक दिया गया है.पूरा समाचार नही मिल पा रहा है ,समाचार माध्यम से, कि, 'हिमालय के उस तरफ क्या हो रहा है....?
लेकिन
उत्तर में हिमालय क्षेत्र के उस पार कुछ हो रहा है.जल्दी ही प्रकृति से समाचार आ जायेगा....
.....मेरी बातो को आप माने या न माने आपकी मर्जी....
परमात्मा का कार्य सदा से ही चलता रहता है.रोकने पर रुकता नही .
मानवीय क्षमता / साइंस अभी उतना समर्थ नही प्राप्त कर सका है.आगे -२ देखते रहिये,खुद ही समझ में आ जायेगा.क्या जल्दी है...?
अघोर शिवपुत्र मजाक का विषय नही है..
अपनी सुरक्षा के लिए इस प्रथम मानव शरीर धारी ''अघोर'' को सम्हाल कर सम्मान के साथ सुरक्षित रखिये.अपने- अपने जगत में.
आत्म रक्षा के लिए अघोर शिवपुत्र का ध्यान कीजिये.घटनाये खुद गवाही देंगी.प्राकृतिक हलचलों को देखते रहिये ..
.........'''''अघोर शिवपुत्र ''''........

Please email your opinion in Hindi using English font to shivputra_ekmission@yahoo.co.in

Wednesday, July 7, 2010

''''''''सावधान..... '''''इस क्षेत्र में ''भूकंप और प्राकृतिक आपदा में तीव्रता'''' आ सकता है..''"

Conversation with my Gurudev (Part IV)

A couple of days back, I spoke to Gurudev and came to know that Gurudev will be travelling within the next 48 hours, outside Delhi, to check the magnetic balance of the Earth. Gurudev also informed that there is a change in the nature right now. The hot weather is changing and Monsoons are arriving from last Saturday onwards i.e. 3rd July 2010. Gurudev also informed that Monsoosns have arrived finally. The heat of the Earth is a bit less right now.

Previously in the Blog, Gurudev had mentioned that as Gurudev will be travelling outside Delhi, there will a drastic change in the nature. Finally I got the news today. I was sitting and watching Star News Channel (Hindi) and got the news that Punjab and Haryana are heavily flooded and Delhi is on high alert. I spoke to Gurudev after watching the news. Gurudev also informed me that there will be more changes in the nature. It seems that as Gurudev had informed about the Triangle, there is a movement in the Triangle. Gurudev himself is the Triangle. So as the Triangle moves, there are movements in the Triangle. But more interesting is, right now we all have to wait and see what changes are waiting further in the nature for us. Only Gurudev knows and we will observe the results of the change in the nature. So lets wait and watch...

Please email your opinion in Hindi using English font to shivputra_ekmission@yahoo.co.in


Thursday, July 1, 2010

''''''''सावधान..... '''''इस क्षेत्र में ''भूकंप और प्राकृतिक आपदा में तीव्रता'''' आ सकता है..'''


तारीख --01 जुलाई...2010 ...समय.... शाम को 05:15.मिनट के लगभग.....
''''क्योकि कुछ दिनों में हम कुछ विशेष कार्य ''एक मिशन '' से दिल्ली से बाहर जा रहे हैं''
...
कुछ विशेष ''काम '' से..
मै जब यहाँ से जाऊंगा तो,मेरे साथ माँ ''मूल शक्तियां ''भी रहेंगी.
हम धरती पर ट्राइंगल हैं .हम ब्रह्माण्डीय अग्निस्तम्भ हैं.
और एक ट्राइंगल दिल्ली में 300 गज जमीन पर स्थित मेरा आसन है.
यह धरती पर स्थित''' जाग्रत ट्राइंगल ''का एक एंगल है...
जो ट्राइंगल पहले उल्टा त्रिकोण.. '.'
'''
केदार नाथ [हिमालय] .>>>कामख्या >>>काशी था''...... '.' ,

माँ की मुक्ति के बाद अब...

''' केदार नाथ [हिमालय ] >>> काशी >>> दिल्ली [अघोर शिवपुत्र अपनी सभी माताओं के साथ .]...

पहले वाले त्रिकोण का आधार परिवर्तन इस धरती पर अब इस त्रिकोण की आकृति में उर्ध त्रिकोण में परिवर्तन हो गया है.

आज की अवस्था पहले वाले त्रिकोण में स्थान परिवर्तन का परिणाम है.
'''
उस त्रिकोण का परिवर्तन अब धरती पर भारत में इस प्रकार बन रहा है......'''
'
''''' केदार नाथ >>>दिल्ली..>>> काशी....'''''
.
..धरती का अभी इस त्रिकोण पर ही ब्रह्मांडीय पुरुष ''मेरे पिता श्री बाबा'''का यहाँ आसन स्थित है...
धरती पर इस ट्राइंगल पर ''मै >बाबा और माँ ''स्थित हैं....
हमारे माँ के साथ चलने फिरने से इस धरती का बैलेंस चेंज होता है.
इसलिए अगर मेरे दिल्ली से बाहर जाने पर इस धरती में इस क्षेत्र में कम्पन बढ़ सकता है ..
और इसके परिणाम स्वरुप दिल्ली और आसपास के क्षेत्रो में अचानक'''' भूकंप के झटके''' आने चालू हो सकते हैं...
यहाँ से हिमालयी क्षेत्र तक में ,क्योकि ट्राइंगल का एक सिरा मुझसे सीधे केदारनाथ जी से जुड़ा हुआ है .
प्राकृतिक उठापटक तेजी से हो रहा है...
अभी मै पूर्व में जा रहा हूँ.इस धरती पर अपने आसन से चल कर..
देखते हैं कि , ''अबकी बार कैसा परिवर्तन आता है ,यहाँ के क्षेत्र में.''
पिछले साल 2009 में अक्तूबर / नवम्बर में जब यहाँ से पश्चिम दिशा में दाहोद [ गुजरात ] में गये थे ,
तो एक सप्ताह में ही 4-5 बार भूकंप के 4 / 5 तीव्रता या कुछ अन्य तीव्रता के ''भूकंप के झटके''आने प्रारंभ हो गये थे...
एक सप्ताह में ही ....
देखते हैं कि, इस बार कैसा होता है.....
यह धरती के मैग्नेटिक संतुलन के लिए भी जरूरी है .
इससे पता चल जायेगा कि किस दिशा में जाने पर इस स्थान से,कैसा प्रभाव होता है
.
इस धरती पर इस क्षेत्र में जहाँ अभी मेरा आसन है...
हमारे चलने फिरने से धरती में हलचल तेज हो जाती है.
कब जाऊंगा एक मिशन को पूरा करने के लिए इसका दिन तारीख निश्चित होते ही बता दूंगा.
यह ऐसा इसलिए लिख रहा हूँ ब्लाग में ताकि जानने के लिए प्रमाण / सनद रहे
और समय आने पर लोगो को दिए गये'''' सन्देश और सुचना''' के रूप में काम आवे...
अगर भूकंप तेज हो जाये,प्राकृतिक उठापटक तेज और निरंतर होने लगे इस क्षेत्र में ,
तो आप मुझे ! इस मानव शारीर धारी साधारण ब्यक्ति को जरुर याद कर लीजियेगा....
जब -जब हम दिल्ली से बाहर निकलेंगे .
इस मेरे ट्राइंगल से सम्बंधित धरती के टुकड़े पर अपनी निगाह रखियेगा.....
मेरे चलने फिरने या फिर अपने एंगल से दूर जाने पर जो धरती के निचे एक उल्टा त्रिकोण '.' बनाया है मैंने,कुछ वर्स पूर्व..उस पर भी दबाव बढेगा.

इसके परिणाम स्वरूप इससे सम्बंधित देश अमेरिका ---पाक और चीन तथा इन तीनो देशो के मित्र उन सभी देशो के समूहों पर ,जो भारत के प्रति गलत तथा आसुरिक विचार रखते हैं और कर्म करते है.कैसे भी...

उन देशो में, प्रकृति में बिध्वंस की गतिविधियाँ प्राकृतिक रूप से तेज हो जायेंगे.
जैसे भूकंप / ज्वालामुखी / आंधी /आग / और दुर्घटना /आकाशीय दुर्घटना ,आर्थिक बिखंडन ,अहंकार का टूटना ,अहंकार किसी भी तरह का हो तथा मारकाट /आपसी लडाई झगडा बढ़ जायेगा..
इन देशो में भूमि -जल -वायु और अग्नि तत्वों में आपसी टकराहट बढ़ जायेंगे जिससे उनकी सृष्टी में जो बिध्वंस प्रारंभ हुआ है ..
माँ को मुक्त करा कर यहाँ उर्ध्व ट्राइंगल .'. और वहां अधोमुखी ट्राइंगल '.' बनाने से ही जो प्रारंभ हो चूका है ..
'''वह'' ,उसकी गति बढ़ जायेगा..
इसको आप प्राकृतिक स्वतंत्र शक्तियों ''मुक्त ''माँ कामख्या'' की अपनी सभी शक्तियों के साथ चलने से इस धरती पर हो रही ''पगध्वनि '' के रूप में देख / सुन ही रहे है...
अभी हम प्रकृति में संतुलन और तीव्रता से परिवर्तन कर रहे हैं.
मानव जाती को सावधान रहने की आवश्यकता और जरूरत है...
विकृत प्रकृति में परिवर्तन के कारण,पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में बिध्वन्स्नात्मक घटनाये और बिखंदनात्मक प्राकृतिक और मानवीय घटना और दुर्घटनाये बढती ही जाएँगी,जो पिछले ३ / ४ साल से बढती ही जा रही है.
अभी मैंने सिर्फ अपने ''अ'' को सक्रीय किया है.''अपने ''अ''में बिस्फोट किया है.
अपने त्रिकोण में गतिविधि / बिस्फोट बढ़ा दिया है.
जल्द ही एक मिशन को पूर्ण करने के लिए हम दिल्ली से बाहर जा रहे है कुछ दिनों के लिए..
प्रकृति में तेजी से घटना क्रम अचानक बदल सकता है...घबराना मत...
.........
........मै हूँ न......
मेरा आसन तो यही पर स्थित है न 300 गज ज़मीन पर.
सम्हाल सकता है तो साइंस सम्हाल ले पहले..
फिर तो मानव शरीर धारी अघोर ''शिवपुत्र है ही..''
हम मानव सामर्थ्य और साइंस को भी पूरा मौका दे रहे है.
अधिकांशत : समाचार हम प्राकृतिक स्तर पर मनुष्य के सामर्थ्य साइंस तक पहुंचा रहे हैं.
यह विकृत प्रकृति में परिवर्तन करने का ''काम'' है ...मेरी माताए स्वतंत्र रूप में अब इस धरती पर मेरे साथ चल फिर रही हैं.
जिससे यह प्राकृतिक पगध्वनि बिध्वन्सत्मक घटनाओं के माध्यम से ब्यक्त हो रहा है.
...'''''
'मेरी माताएं कोई सामान्य ''स्त्री शरीरधारी औरत नही हैं .
बल्कि यह सब ''बाबा '' की मूल शक्तिया हैं.
जिनके पास / आजकल मुक्ति के बाद मैं भी रहता हूँ.
यह जाग्रत त्रिकोण के चहल कदमी का परिणाम है.
अब क्या करे..?...'' जगत ''में है और ''काम '' तो लगा ही रहता रहेगा .
'
'
मेरे हर '''काम '' का एक अर्थ है....
'
'
मेरा ''धर्म'' है कि , मै बंधन में पड़ी हुयी अपनी शक्तियों को ''मुक्त'' कराता जाऊ ,इस धरती पर से...
.
..
जब भी मै किसी शक्ति को मुक्त करता हूँ तो धरती के संतुलन को भी सम्हालना पड़ता है.
और धरती के संतुलन को सम्हालने के कारण धरती में और प्रकृति में हलचल बढ़ जाती है.
मुझे यह प्राकृतिक जगत को भी सम्हालना पड़ता है.
अन्यथा प्रलय में बर्बादी प्रारंभ होना तीव्र हो जायेगा.
देखता हूँ....
इस बार क्या -क्या होता है....?
क्या लिखा है,इस धरती पर रहने वाली मानव जाती की ,इस प्रकृति में ...''''भाग्य.'''...???
सामने स्पस्ट हो जायेगा.देखते हैं ..तुम सब भी देख लो....
सभी के लिए जरुरी है,वर्तमान में घटित हो रही घटनाओ को जान लेना.
हम सभी एक साथ इस धरती पर अपना -अपना जीवन जी रहे है.हम अपना काम कर रहे है,आप अपना..मेरे ''काम'' से प्रकृति में परिवर्तन होता है और आसन से उठ कर चलने फिरने से भूकंप और प्राकृतिक तत्वों के परमाणुओ में टकराहट बढ़ने से बिस्फोट होता है.
....
.....
यही मेरा जीवन है,,.......
यही मेरा स्वभाव ......
''''
अघोर शिवपुत्र'''''''

Please email your opinion in Hindi using English font to shivputra_ekmission@yahoo.co.in