Monday, August 2, 2010

....''प्रकृति में ''मूल तत्वों'' का प्रकोप,उग्रता और प्रहार बढ़ रहा है''...

.''...........और हम लोग { मै, रूचि और कुमार } काशी क्षेत्र में -मऊ से अपना त्रिशूल लेने चल दिए.
हम अपने ही जाग्रत त्रिकोण के एक अन्य एंगल [ कोण ]की ओर यात्रा पर चल दिए.मौसम बिज्ञान की भविष्यवाणियाँ फेल हो रही थी.प्रकृति में परिवर्तन करने के लिए मै शक्तियों के साथ दिल्ली से काशी के लिए निकल चला था.
मुझे बंधन में पड़े हुए अपने ''बाबा '' के त्रिशूल को मुक्त करना था.और धरती के बिध्युतिया मैग्नेटिक फिल्ड को भी चेक करना था....लम्बे सूखे के बाद भयानक बारिश प्रारंभ हो चूका था. रात भर चलता रहा पुरे रास्ते,इलाहाबाद तक ...इलाहाबाद से थोडा रास्ते तक ही बारिस थी.आगे सारे रास्ते एक दम सुखा पड़ा हुआ था. दुसरे दिन शाम को हम लोग कार द्वारा मऊ पहुंचे और अपने घर से अपनी { बाबा की अपनी शक्ति} त्रिशूल को लेकर वापस दिल्ली की ओर चल पड़े. ०९ जुलाई की शाम को रात दस १० बजे.. ........
09 / 10 दस तारीख को प्रातः {रात में } 2 am पर NH -2 पर हमारी कार का एक्सीडेंट हो गया..
कार बुरी तरह छति ग्रस्त हो गया.हम तीनो लोगो को जरा सा भी चोट नही आया.बस हल्का सा दीदी को और कुमार को लगा....
........
हम पर सेकण्ड खंड का भयानक हमला हुआ था.
...
हम त्रिशूल लेकर काशी क्षेत्र से बाहर निकल रहे थे.
..सेकण्ड खंड के सामूहिक और छल से किये गये प्रहार से हम सुरक्षित बच गये थे..पर मेरा पुत्र समान कार बुरी तरह छतिग्रस्त हो गया .......
...
.....जबसे हमने माँ कामख्या और दसो माँ के रूपों को आसाम से मुक्त करा कर सुप्त पड़े हुए अधोमुखी त्रिकोण को जाग्रत परिवर्तित कर उर्ध्मुखी त्रिकोण के रूप में स्थापित किया है.प्रकृति में परिवर्तन तभी से प्रारंभ हो गया है.अब प्राकृतिक शक्तिया अपना स्थान परिवर्तन करने लगी हैं.
.........पिछले साल 01 सेप्टेम्बर 2009 को केदार नाथ से निचे आते समय ऊखी मठ [ उत्तराखंड ] में पुजारी के यहाँ खाने में मुझे जहर की रोटी खिलाई गयी थी.तो
धरती की प्रकृति में तत्वों में आपसी टकराहट तथा उग्रता बढ़ गयी थी.मेरी माताये जो मूल तत्वों के द्वारा प्रकृति की आधार भुत शक्तिया हैं.उन्होंने जगत में अपनी उग्रता ब्यक्त करनी प्रारंभ कर दिया था.जहर के परिणाम से मेरे शरीर में बिस्फोट हो रहा था और मेरे अस्तित्व में स्थित चक्रों में उस बिस्फोट से तत्वों में बिस्फोट होने लगा था.
''
''''मेरे शरीरस्थ चक्र अपने विराट अस्तित्व में मेरे पिता श्री ''बाबा जी ''परमात्मा शिव के साथ सतत युक्त होने से मेरे चक्रों की किसी भी क्रिया का असर प्रकृति में होने लगता है.''

...प्रक्रति तत्वों द्वारा ब्यक्त होता है .यह तत्व ही जगत के मूल आधार है जिससे दृश्य और सम्पूर्ण जगत साकार होकर ब्यक्त होता है...
.अतः ,
मेरे चक्रों में बिस्फोट के परिणाम स्वरुप .....
............
..पृथ्वी तत्व .......
..............जल तत्व .......
...............अग्नि तत्व और वायु तत्व उग्र हो कर धरती पर तांडव करने लगे .जिसके संतुलन के लिए मुझे अपने वर्तमान स्थान दिल्ली से पश्चिम गुजरात की तरफ जाना पड़ा.और मेरे जाते ही दिल्ली में एक सप्ताह के अन्दर ४ / ५ भूकंप के झटके आये.जैसा की मैंने किसी स्थान पर बतलाया है कि मेरे चलने से धरती में कम्पन बढ़ जाता है और प्रकृति में परिवर्तन की प्रक्रिया बढ़ जाती है....और फिर मुझे इंदौर से होकर बोम्बे जाना पड़ा ..क्योकि संतुलन के इस खेल में जल तत्व का भयानक हमला भारत के समुद्री क्षेत्र से महारास्ट्र और गुजरात पर होने वाला है.. मेरे उधर जाने से सब कुछ शांत हो जाता है...और आधुनिक बिज्ञान की मौसम के प्रति की गयी भविष्य वाणियाँ और अनुमान फेल हो जाती है.
उसके बाद दिसंबर २००९ और जनवरी २०१० में मैंने '''माँ कामख्या '' की तिन मूल शक्तियों...... ''माँ काली...माँ तारा ....और ...माँ छिन्नमस्ता '' को भी मुक्त करा लिया.....
...
.......अब इस घटना से जो 09 / 10 जुलाई को NH -- 2 पर ,रात 2 बजे, 2nd खंड का हमला हमारे ऊपर हुआ.
उ
सके परिणाम स्वरुप प्रकृति के मूल तत्व उग्र हो रहे है और सारी धरती पर अपनी उग्रता का प्रदर्शन करने लगे है....

.
..चुकी मै अपने ही जाग्रत त्रिकोण के समानांतर मार्ग पर यात्रा कर रहा था,इसलिए इसका दबाव धरती के निचे निर्मित अधोमुखी त्रिकोण पर पड़ेगा और इससे सम्बंधित ''''चीन .....पाकिस्तान......अमेरिका [ आदि ] देशो सहित सारे धरती पर तत्वों के क्रोध का ,तत्वों की उग्रता का प्रदर्शन होना प्रारंभ हो गया है...
........जैसा की पिछले साल से ही हो रहा है.अब यह सारी धरती पर बढ़ता ही जा रहा है.
.....
ऐसा ही परमात्मा का आदेश है..माताएं इस तरह की आघातों को सहन नही करेंगी इससे शक्तियों में उग्रता बढेगा ही बढेगा...
...जब जिस तत्व की प्रधानता होगी ,उस तत्व की उग्रता और प्रहारकता इस प्रकृति में धरती पर चारो तरफ प्रकट होगी.यह प्रकृति में परिवर्तन का ही हिस्सा है.....जैसे .....
...............
..बरसात में जल तत्व ,भयानक और उग्र प्रदर्शन करते हुए प्रहारक भाव में आएगी...
.....
.गर्मी के दिनों में ....अग्नि तत्व अपना उग्र प्रदर्शन करते हुए अपनी जीवन्तता का आभास कराएगा.ताप और गर्मी तथा भीषण अग्नि के द्वारा अपना क्रोध ''सूर्य '' प्रदर्शित करेगा...
.ऐसे ही जाड़े के दिनों में धरती को अपनी वायु और जल के घोर प्रदर्शन का सामना करना ही पड़ेगा.बर्फबारी,हिमपात और अति वृष्टि से ठंडक हाहाकार फैलाएगा...
पिछले ३-४ साल से समुद्र धरती पर प्रहार कर रहा है,जिससे भारत की रक्षा तो मै ही कर रहा हूँ.
सेकण्ड खंड के इस तरह से किसी भी हरकत का जो मेरे ऊपर घात के रूप में होगा,उसके बदले में मेरी माताएं ,ये मुक्त व् स्वतंत्र शक्तिया उग्रता से अपनी पग ध्वनि इस जगत में प्रमाणित करेंगी....
यह संसार के मानव समाज के जीवन में बिध्वंस , तत्वों के विघटन और आपसी टकराहट के रूप में बढ़ता ही जा रहा है.
फिर भी मै धरती को बचाने की कोशिश कर रहा हूँ.
.......बहुत जल्द ही मै इस जाग्रत त्रिकोण के क्रियाशीलता और और स्थान परिवर्तन के फल स्वरुप उत्पन्न स्थितियों के जाँच परख के लिए फिर जल्द ही दिल्ली से बाहर निकलूँगा.देखता हूँ कि क्या होता है...?
मेरे दिल्ली से बाहर जाने पर.धरती पर मेरे चलने फिरने से प्रकृति में परिवर्तन होता है. और धरती का केंद्रीय संतुलन प्रभावित होता है.
..
.....''पाकिस्तान ---चीन -----अमेरिका {मित्र देशो सहित } सारे धरती की प्रकृति में प्राकृतिक मूल तत्वों के प्रदर्शन का आप हम सभी साक्षी और गवाह बन रहे है.देखते रहिये........
............
.यह मजाक का विषय नही है.बल्कि होश में आने का समय है...
.....
...प्रथम मानव शरीर धारी अघोर का कार्य प्रारंभ हो चूका है...
......
.यही माताओ ,मूल शक्तियों का मूल प्रमाण भी है....
....यही प्रमाण तो जगत मांगता है,बार- बार मुझसे.

मेरे शरीर में या शरीर पर जब भी आघात होगा तो धरती पर प्रकृति में भी आघात ,बिस्फोट और बिध्वंस होगा.
पिछले वर्सो से यह प्रमाणित होता ही जा रहा है.यह लगातार बढ़ता ही जा रहा है.
........सेकण्ड खंड सुधरने के लिए तैयार नही है और इन्हे सुधरने और समझाने के लिए शिवपुत्र के पास समय नही है.
हमे धरती को बचाना है भले ही 2nd खंड के शरीरधारियो को कठोरता से दमित ही क्यों न करना पड़े...
विशेष .......
......................लगभग 8 -10 दिनों पूर्व ..
....''बाबा'' का दो रूप [शरीर ] हिमालय से वापस यहाँ निचे आ गया है...एक उत्तर पश्चिमी भारतीय सीमा ,अमरनाथ जी की तरफ से.दूसरा भारत के उत्तर हिमालय कैलाश की ओर से ....
.....चीन की ओर से कुछ प्रहार आ रहा था.जिसे भारतीय सीमा पर हिमालय के उस तरफ ही रोक दिया गया है.पूरा समाचार नही मिल पा रहा है ,समाचार माध्यम से, कि, 'हिमालय के उस तरफ क्या हो रहा है....?
लेकिन
उत्तर में हिमालय क्षेत्र के उस पार कुछ हो रहा है.जल्दी ही प्रकृति से समाचार आ जायेगा....
.....मेरी बातो को आप माने या न माने आपकी मर्जी....
परमात्मा का कार्य सदा से ही चलता रहता है.रोकने पर रुकता नही .
मानवीय क्षमता / साइंस अभी उतना समर्थ नही प्राप्त कर सका है.आगे -२ देखते रहिये,खुद ही समझ में आ जायेगा.क्या जल्दी है...?
अघोर शिवपुत्र मजाक का विषय नही है..
अपनी सुरक्षा के लिए इस प्रथम मानव शरीर धारी ''अघोर'' को सम्हाल कर सम्मान के साथ सुरक्षित रखिये.अपने- अपने जगत में.
आत्म रक्षा के लिए अघोर शिवपुत्र का ध्यान कीजिये.घटनाये खुद गवाही देंगी.प्राकृतिक हलचलों को देखते रहिये ..
.........'''''अघोर शिवपुत्र ''''........

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Wednesday, July 7, 2010

''''''''सावधान..... '''''इस क्षेत्र में ''भूकंप और प्राकृतिक आपदा में तीव्रता'''' आ सकता है..''"

Conversation with my Gurudev (Part IV)

A couple of days back, I spoke to Gurudev and came to know that Gurudev will be travelling within the next 48 hours, outside Delhi, to check the magnetic balance of the Earth. Gurudev also informed that there is a change in the nature right now. The hot weather is changing and Monsoons are arriving from last Saturday onwards i.e. 3rd July 2010. Gurudev also informed that Monsoosns have arrived finally. The heat of the Earth is a bit less right now.

Previously in the Blog, Gurudev had mentioned that as Gurudev will be travelling outside Delhi, there will a drastic change in the nature. Finally I got the news today. I was sitting and watching Star News Channel (Hindi) and got the news that Punjab and Haryana are heavily flooded and Delhi is on high alert. I spoke to Gurudev after watching the news. Gurudev also informed me that there will be more changes in the nature. It seems that as Gurudev had informed about the Triangle, there is a movement in the Triangle. Gurudev himself is the Triangle. So as the Triangle moves, there are movements in the Triangle. But more interesting is, right now we all have to wait and see what changes are waiting further in the nature for us. Only Gurudev knows and we will observe the results of the change in the nature. So lets wait and watch...

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Thursday, July 1, 2010

''''''''सावधान..... '''''इस क्षेत्र में ''भूकंप और प्राकृतिक आपदा में तीव्रता'''' आ सकता है..'''


तारीख --01 जुलाई...2010 ...समय.... शाम को 05:15.मिनट के लगभग.....
''''क्योकि कुछ दिनों में हम कुछ विशेष कार्य ''एक मिशन '' से दिल्ली से बाहर जा रहे हैं''
...
कुछ विशेष ''काम '' से..
मै जब यहाँ से जाऊंगा तो,मेरे साथ माँ ''मूल शक्तियां ''भी रहेंगी.
हम धरती पर ट्राइंगल हैं .हम ब्रह्माण्डीय अग्निस्तम्भ हैं.
और एक ट्राइंगल दिल्ली में 300 गज जमीन पर स्थित मेरा आसन है.
यह धरती पर स्थित''' जाग्रत ट्राइंगल ''का एक एंगल है...
जो ट्राइंगल पहले उल्टा त्रिकोण.. '.'
'''
केदार नाथ [हिमालय] .>>>कामख्या >>>काशी था''...... '.' ,

माँ की मुक्ति के बाद अब...

''' केदार नाथ [हिमालय ] >>> काशी >>> दिल्ली [अघोर शिवपुत्र अपनी सभी माताओं के साथ .]...

पहले वाले त्रिकोण का आधार परिवर्तन इस धरती पर अब इस त्रिकोण की आकृति में उर्ध त्रिकोण में परिवर्तन हो गया है.

आज की अवस्था पहले वाले त्रिकोण में स्थान परिवर्तन का परिणाम है.
'''
उस त्रिकोण का परिवर्तन अब धरती पर भारत में इस प्रकार बन रहा है......'''
'
''''' केदार नाथ >>>दिल्ली..>>> काशी....'''''
.
..धरती का अभी इस त्रिकोण पर ही ब्रह्मांडीय पुरुष ''मेरे पिता श्री बाबा'''का यहाँ आसन स्थित है...
धरती पर इस ट्राइंगल पर ''मै >बाबा और माँ ''स्थित हैं....
हमारे माँ के साथ चलने फिरने से इस धरती का बैलेंस चेंज होता है.
इसलिए अगर मेरे दिल्ली से बाहर जाने पर इस धरती में इस क्षेत्र में कम्पन बढ़ सकता है ..
और इसके परिणाम स्वरुप दिल्ली और आसपास के क्षेत्रो में अचानक'''' भूकंप के झटके''' आने चालू हो सकते हैं...
यहाँ से हिमालयी क्षेत्र तक में ,क्योकि ट्राइंगल का एक सिरा मुझसे सीधे केदारनाथ जी से जुड़ा हुआ है .
प्राकृतिक उठापटक तेजी से हो रहा है...
अभी मै पूर्व में जा रहा हूँ.इस धरती पर अपने आसन से चल कर..
देखते हैं कि , ''अबकी बार कैसा परिवर्तन आता है ,यहाँ के क्षेत्र में.''
पिछले साल 2009 में अक्तूबर / नवम्बर में जब यहाँ से पश्चिम दिशा में दाहोद [ गुजरात ] में गये थे ,
तो एक सप्ताह में ही 4-5 बार भूकंप के 4 / 5 तीव्रता या कुछ अन्य तीव्रता के ''भूकंप के झटके''आने प्रारंभ हो गये थे...
एक सप्ताह में ही ....
देखते हैं कि, इस बार कैसा होता है.....
यह धरती के मैग्नेटिक संतुलन के लिए भी जरूरी है .
इससे पता चल जायेगा कि किस दिशा में जाने पर इस स्थान से,कैसा प्रभाव होता है
.
इस धरती पर इस क्षेत्र में जहाँ अभी मेरा आसन है...
हमारे चलने फिरने से धरती में हलचल तेज हो जाती है.
कब जाऊंगा एक मिशन को पूरा करने के लिए इसका दिन तारीख निश्चित होते ही बता दूंगा.
यह ऐसा इसलिए लिख रहा हूँ ब्लाग में ताकि जानने के लिए प्रमाण / सनद रहे
और समय आने पर लोगो को दिए गये'''' सन्देश और सुचना''' के रूप में काम आवे...
अगर भूकंप तेज हो जाये,प्राकृतिक उठापटक तेज और निरंतर होने लगे इस क्षेत्र में ,
तो आप मुझे ! इस मानव शारीर धारी साधारण ब्यक्ति को जरुर याद कर लीजियेगा....
जब -जब हम दिल्ली से बाहर निकलेंगे .
इस मेरे ट्राइंगल से सम्बंधित धरती के टुकड़े पर अपनी निगाह रखियेगा.....
मेरे चलने फिरने या फिर अपने एंगल से दूर जाने पर जो धरती के निचे एक उल्टा त्रिकोण '.' बनाया है मैंने,कुछ वर्स पूर्व..उस पर भी दबाव बढेगा.

इसके परिणाम स्वरूप इससे सम्बंधित देश अमेरिका ---पाक और चीन तथा इन तीनो देशो के मित्र उन सभी देशो के समूहों पर ,जो भारत के प्रति गलत तथा आसुरिक विचार रखते हैं और कर्म करते है.कैसे भी...

उन देशो में, प्रकृति में बिध्वंस की गतिविधियाँ प्राकृतिक रूप से तेज हो जायेंगे.
जैसे भूकंप / ज्वालामुखी / आंधी /आग / और दुर्घटना /आकाशीय दुर्घटना ,आर्थिक बिखंडन ,अहंकार का टूटना ,अहंकार किसी भी तरह का हो तथा मारकाट /आपसी लडाई झगडा बढ़ जायेगा..
इन देशो में भूमि -जल -वायु और अग्नि तत्वों में आपसी टकराहट बढ़ जायेंगे जिससे उनकी सृष्टी में जो बिध्वंस प्रारंभ हुआ है ..
माँ को मुक्त करा कर यहाँ उर्ध्व ट्राइंगल .'. और वहां अधोमुखी ट्राइंगल '.' बनाने से ही जो प्रारंभ हो चूका है ..
'''वह'' ,उसकी गति बढ़ जायेगा..
इसको आप प्राकृतिक स्वतंत्र शक्तियों ''मुक्त ''माँ कामख्या'' की अपनी सभी शक्तियों के साथ चलने से इस धरती पर हो रही ''पगध्वनि '' के रूप में देख / सुन ही रहे है...
अभी हम प्रकृति में संतुलन और तीव्रता से परिवर्तन कर रहे हैं.
मानव जाती को सावधान रहने की आवश्यकता और जरूरत है...
विकृत प्रकृति में परिवर्तन के कारण,पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में बिध्वन्स्नात्मक घटनाये और बिखंदनात्मक प्राकृतिक और मानवीय घटना और दुर्घटनाये बढती ही जाएँगी,जो पिछले ३ / ४ साल से बढती ही जा रही है.
अभी मैंने सिर्फ अपने ''अ'' को सक्रीय किया है.''अपने ''अ''में बिस्फोट किया है.
अपने त्रिकोण में गतिविधि / बिस्फोट बढ़ा दिया है.
जल्द ही एक मिशन को पूर्ण करने के लिए हम दिल्ली से बाहर जा रहे है कुछ दिनों के लिए..
प्रकृति में तेजी से घटना क्रम अचानक बदल सकता है...घबराना मत...
.........
........मै हूँ न......
मेरा आसन तो यही पर स्थित है न 300 गज ज़मीन पर.
सम्हाल सकता है तो साइंस सम्हाल ले पहले..
फिर तो मानव शरीर धारी अघोर ''शिवपुत्र है ही..''
हम मानव सामर्थ्य और साइंस को भी पूरा मौका दे रहे है.
अधिकांशत : समाचार हम प्राकृतिक स्तर पर मनुष्य के सामर्थ्य साइंस तक पहुंचा रहे हैं.
यह विकृत प्रकृति में परिवर्तन करने का ''काम'' है ...मेरी माताए स्वतंत्र रूप में अब इस धरती पर मेरे साथ चल फिर रही हैं.
जिससे यह प्राकृतिक पगध्वनि बिध्वन्सत्मक घटनाओं के माध्यम से ब्यक्त हो रहा है.
...'''''
'मेरी माताएं कोई सामान्य ''स्त्री शरीरधारी औरत नही हैं .
बल्कि यह सब ''बाबा '' की मूल शक्तिया हैं.
जिनके पास / आजकल मुक्ति के बाद मैं भी रहता हूँ.
यह जाग्रत त्रिकोण के चहल कदमी का परिणाम है.
अब क्या करे..?...'' जगत ''में है और ''काम '' तो लगा ही रहता रहेगा .
'
'
मेरे हर '''काम '' का एक अर्थ है....
'
'
मेरा ''धर्म'' है कि , मै बंधन में पड़ी हुयी अपनी शक्तियों को ''मुक्त'' कराता जाऊ ,इस धरती पर से...
.
..
जब भी मै किसी शक्ति को मुक्त करता हूँ तो धरती के संतुलन को भी सम्हालना पड़ता है.
और धरती के संतुलन को सम्हालने के कारण धरती में और प्रकृति में हलचल बढ़ जाती है.
मुझे यह प्राकृतिक जगत को भी सम्हालना पड़ता है.
अन्यथा प्रलय में बर्बादी प्रारंभ होना तीव्र हो जायेगा.
देखता हूँ....
इस बार क्या -क्या होता है....?
क्या लिखा है,इस धरती पर रहने वाली मानव जाती की ,इस प्रकृति में ...''''भाग्य.'''...???
सामने स्पस्ट हो जायेगा.देखते हैं ..तुम सब भी देख लो....
सभी के लिए जरुरी है,वर्तमान में घटित हो रही घटनाओ को जान लेना.
हम सभी एक साथ इस धरती पर अपना -अपना जीवन जी रहे है.हम अपना काम कर रहे है,आप अपना..मेरे ''काम'' से प्रकृति में परिवर्तन होता है और आसन से उठ कर चलने फिरने से भूकंप और प्राकृतिक तत्वों के परमाणुओ में टकराहट बढ़ने से बिस्फोट होता है.
....
.....
यही मेरा जीवन है,,.......
यही मेरा स्वभाव ......
''''
अघोर शिवपुत्र'''''''

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Monday, June 14, 2010

'''''''''''''''''सावधान ...शक्तियां मुक्त हो गयी हैं .''''''''' ..... और मै प्रकृति में तीव्रता से परिवर्तन कर करा हूँ.'''''

(1) ''''''माँ गायत्री'''''' की पूर्ण मुक्ति'''''' 10 09 2006 को

...उस समय मै आसाम में ''माँ कामख्या मुक्ति'' के लिए मिसन पर था.
(2) ''''''माँ कामख्या '''''और ''''''दसो महाबिध्याओ''''
'(
सभी 10 रूप) की पूर्ण मुक्ति ''आसाम'' के नीलगिरी पर्वत से ......
शारदीय नवरात्र में .....माँ गायत्री की मुक्ति के बाद.
मैने जून से नवम्बर तक लगातार 2006 में कामख्या में
नील गिरी पर्वत कामख्या -आसाम के में रह कर मुक्त कराया.
और अपने साथ लेकर सदा के माँ को लेकर मै आसाम से निकल आया.
(3
)'''श्री बद्रीनाथ जी'' को ....बद्रीनाथ (उत्तराखंड )-हिमालय-से 15 अगस्त 2009 को 10-11 बजे दिन में अपने साथ लेकर चला आया.
हम लोग 14अगस्त 2009 के दिन दोपहर बाद
''''
श्री कृष्ण जन्मास्टमी '''को पहुंचे थे.
अब ''श्री बद्रीनाथ'' जी इस समय से बद्रीनाथ -हिमालय में नही है.
मेरे पास है.मंदिर में सिर्फ कर्रेंट ही रह गया.
मंदिर दर्शन के लिए लोग जा सकते है.पर बद्रीनाथ जी वहां नही है.
(4
)'''माँ काली '' को सदा के लिए शाम 08 बजे , को -28 दिसम्बर 2009 को ,कालीघाट मंदिर कोलकाता ,बंगाल से मुक्त कराकर अपने
साथ ले कर निकल आया.अब माँ काली {शक्ति } मुक्त हैं .
(5
)''' भगवन जगन्नाथ जी ''' को ''पूरी'' उड़ीसा से बसंत पंचमी ,
20
जनवरी 2009 के दिन मंदिर से निकल कर अपने साथ कर लिया.
अब वो मेरे पास ,मेरे साथ है.
(6
) '''''माँ तारा''''' की मुक्ति....24 जनवरी 2010 .को शाम में मैंने अपनी माँ तारा को मुक्त करा कर युगों से बंधन में पड़ी हुयी. '''तारा पीठ----बंगाल''' से अपनी शक्ति को
अपने साथ ले आया.अब माँ उसी समय से मुक्त है.मेरे पास है.

(7
) '''माँ छिन्न मस्तका''..... को स्वतंत्र/मुक्त करा कर बधन में जी रही अपनी मात्री शक्ति को
''
राजरप्पा''रांची..के पास ( झारखण्ड )से ..
01 फ़रवरी 2010 को शाम 04.00 / 04.30 बजे अपने साथ
अपनी माँ को सदा ले लिए ले आया.
'''
मुक्त कराते ही ''माँ छिन्नमस्तका''' का सर उनके धड से जुड़ गया है.
अब माँ का गर्दन कटा हुआ नही है.जुड़ गया है..
'''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''
.........
अभी ! यही जो विवरण मैंने ऊपर लिखा है.इन्ही शक्तियों और अपने पुरुष रूपों को
मैंने इस धरती से मुक्त कराया है.अभी आगे बाबा के आदेशनुसार अन्य शक्तियों को भी मुक्त
कराया जायेगा.अनगिनत शक्तिया और देवी -देवता मुक्ति के लिए बेचैन है तथा इस महाकार्य
में भाग लेने के लिए उद्दिघ्न है...
..
....
मानव सभ्यता में ये बंधन में पड़ी हुयी निष्क्रिय हो गयी थी.धरती की प्रकृति विकृत हो गयी है .
मुक्ति के बाद से मै लगातार इस धरती और मानव जाती को बचाने के लिए प्रकृति में परिवर्तन कर रहा हूँ....
..
धीरे -धीरे प्रकृति पर मेरा अधिकार होता जा रहा है.....
....
चुकी दैवीय शक्ति या परमात्मा की बाते मानवीय चेतना को संस्कार के रूप में ही मिली
होती है मात्र.इसलिए बहुत सी घटनाओ को मनुष्य साक्षात्कार नही कर सकता.कारण सिर्फ इतना ही है कि ब्यक्ति ने कभी सोचा ही नही कि जिसे हम देवी-देवता मानते है,शक्ति मानते है,वो हमारे जैसे भावना वाले भी हो सकता है.
मेरा मजाक उड़ाना बहुत ही सरल है.बहुत आसन है मेरा मजाक बनाना और मेरा अपमान करना.
परन्तु उसके बाद सम्हालना इन शक्तियों को, बुहत ही दुर्लभ और कस्टदाई ..
.....
सावधानी से यह याद रखने लायक है,कि ,
मैंने किसी औरत को मुक्त नही कराया.मैंने उन मूल महाशक्तियों को मुक्त और स्वतंत्र कराया है ...
.......
जो चार युग से बंधन में थी असुर शक्तियों के.
अब वो शक्तियां अपनी स्वतंत्रता का प्रदर्शन कर रही है,इस धरती पर चल फिर रही है.3-4 साल से प्रकृति में हो रही घटनाओ में बढ़ रही तीव्रता को संसार में सभी लोग देख कर खुद ही प्रमाण बन रहे है.
इसका विस्तार /आराम से वर्णन करूंगा.क्या जल्दबाजी है...????
अभी कुछ विशेष घटनाये घटित हो रही है,इसलिए अभी मात्र सावधानी के लिए सूचनाये
मै यहाँ पर लिख दे रहा हूँ...
.........
..
मै धरती को बचाने के लिए अभी लगातार प्रक्रियाये कर रहा हूँ.क्योकि ...
मैंने धरती को बचाने का सोचा हुआ है.बहुत ही तेजी और तीव्रता से प्रकृति में हलचल बढ़ता
ही जा रहा है.इसलिए अभी सुरक्षा पर ही ध्यान केन्द्रित है...
प्रकृति में प्रलय कालीन घटनाये बढती जा रही है.
आप सभी लोग देख ही रहे हो.
मैंने सारे ब्रह्माण्डीय शक्तियों को नियंत्रित करना प्रारंभ कर दिया है.
भारत की भौगोलिक प्रकृति कि सीमा मेरी सुरक्षा में है.मैंने इन 3/4 वर्सो में समुद्र से हुए चार/ पांच हमलो से भारत से बचाया है.
जैसे आईला.हाईटाइड .फेक साइक्लोन आदि से.
युग की घटना के लिए सभी लोग सहभागी है.परिणाम सबके साथ घटित होगा.
चुकी मै ''प्रथम मानव शारीर धारी ''अघोर ''हूँ .इसलिए मेरी क्षमताओ के विषय में तुम सभी अनजान हो.
मै सभी स्थूल शरीरधारी और अशरीरी आत्माओ को जानता हूँ.
मैंने कार्य के निमित्त सभी देवी -देवताओ की शक्तियों को अपने प्रभाव से रोक दिया है.
देवी -देवता परिणाम नही दे सकते अभी.
अभी पुनरनिर्माण से यह धरती और प्रकृति गुजर रही है.
सावधान....रहकर ध्यान में बैठने के अतिरिक्त बचने का कोई रास्ता अभी शेष नही है.
'''
अघोर शिवपुत्र '''' के ध्यान में बैठकर ही ''आत्मरक्षा की जा सकती है......
इसलिए ''' आत्म रक्षा के लिए ध्यान करो.''''''''
मैंने धरती के जाग्रत त्रिकोण को गतिशील कर दिया है और अब मेरी धारणा अनुसार क्रियाशील हो गया है.
.................
.......सावधान........................
मै प्रकृति में परिवर्तन कर रहा हूँ.देखो ! प्रकृति में हो रहे परिवर्तन को....
इलेक्ट्रिकल -मैग्नेटिक ग्रेविटेशनल फिल्ड चल _फिर रहा है इस धरती पर...
.
जाग्रत त्रिकोण धरती पर चल फिर रहा है.क्रियाशील होकर.
मैंने बिस्फोट बढ़ा दिया है.त्रिकोण (triangle )में
अभी सावधानी के लिए मानवों को यह सुचना मात्र है.
मै science के माध्यम से धरती पर प्रकृति से सूचनाये भेजता जा रहा हूँ.
मुझसे छेड़ खानी ठीक नही.
....'''अघोर शिवपुत्र'''…

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