Friday, March 25, 2011

'' बिधाता ''परमात्मा'' द्वारा कार्य क्रम की ताजा खबर.!.सुचना और सन्देश''






तारीख..25 मार्च.2011 .10 .49 .am ..

'''शिवपुत्र एक मिशन'' के ब्लॉग को पढने वाले बहुत सारे पाठको में से अनेको ने कई बार हमसे यह पूछा है और जानना चाहा है..की,
''यह सब क्या है,जो आपके नाम से इस ब्लॉग में लिखा जा रहा है.इसका क्या अर्थ है और क्या मकसद है...?..''
बहुत ही प्यारा और अर्थपूर्ण जिज्ञासा तथा इक्षा है.मुझे बहुत अच्छा लगता है...जब कोई जानना चाहता है और अपने आपको मेरे सामने ब्यक्त करता है,जानने की भूख लेकर...
पाठक भी अनेक तरह के लोग होते हैं और उन पाठकों में से पूछने वाले भी अनेको प्रकार की भावनाओं वाले होते हैं.पहले यहाँ यह समझ लेना जरूरी हो जाता है,आगे बढ़ने से पूर्व,की,'' मै'' कभी भी किसी भी प्रश्न के उत्तर नही देता.क्योकि प्रश्न का उत्तर देना और तर्क,वितर्क करना ज्ञानियों व् बुद्धिजीवियों की जिम्मेदारी ,आदत,सामर्थ,क्षमता ,योग्यता और स्वभाव है...
''
मै'' और यह ब्लॉग तथा ''शिवपुत्र एक मिशन ''किसी भी प्रश्न का उत्तर देने में अपना अनमोल और दुर्लभ समय नस्ट नही करता,बल्कि समाधान करता है.जिससे प्रश्न उठने का अंत हो सके.
समाधान .!..उत्तर नही होता,बल्कि प्रश्न का ,जो प्रश्न बार-बार उठ रहे है मानव जीवन में उसका समाधान कर देता है.और ब्यक्ति प्रश्नों में ना उलझ कर अपना जीवन में समाधान प्राप्त करता हुआ, आगे का अपना शेष जीवन उत्क्रिस्ट कर्म करते हुए जी लेता है,बिना किसी संदेह के...
प्रश्न उठते हैं .संदेह व् अज्ञानता के कारण.अगर संदेह ही मिट जाये तो समाधान मील जाता है .फिर प्रश्न नही उठता.
मानव जीवन का लक्ष्य ही होना चाहिए प्रश्नों से मुक्ति...
जिस मानवीय जगत में प्रश्नों और उत्तरों की भीड़ लगी है.और इन प्रश्न तथा उत्तरों की भीड़ ने मानव जीवन में और मानवीय चेतना में कोलाहल और असमानता का शोर मचा कर सारी जिन्दगी को अस्त-ब्यस्त कर दिया हो.उसमे मेरे पास समय ही कहाँ की,उत्तरों में उलझाऊं...?..और प्रश्न ,मूल प्रश्न,उत्तरों के बाद भी प्रश्न बना रह जाये.....?..
''
परमात्मा'' द्वारा ''अघोर''..!...''प्रथम मानव शरीरधारी ''अघोर'' का निर्माण 'समाधान ' करने के लिए ही किया गया है...''
..
क्योकि आज ज्ञानी वर्तमान समाज और जीवन में प्रश्न तथा उत्तरों के कोलाहल में,समाधान के अभाव में अन्दर की कुंठा और आंतरिक तड़प वैसे ही शेष रह जाता है,जैसे समुद्र के जल में प्यास से चटपटा रहा मानव..
...
यह ब्लॉग और मै एक माध्यम हूँ.''परमात्मा'' के ताजा कार्यक्रम के खबर का.वर्तमान समय में जबकि चारो तरफ पहुचे हुए ज्ञानियों ,बुद्धिमान जनों और पहुचे हुए बैज्ञानिको की भीड़ लगी हुयी है.और इन सबमे आपस में चल रही धक्का मुक्की का परिणाम आज का जगत और सभ्यता है...
आज सभ्यताओं के पास मानव जगत का सबसे बड़ा ज्ञान और सामर्थ बिज्ञान है.
जो हर क्षेत्र में अपना प्रदर्शन कर रहा है.तो कही बिभिन्न प्रकार के रंग बिरंगे धर्म, हैं.और अगर कुछ बचा ,तो तरह-तरह के अध्यात्म और दर्शन हैं,जो बरसो से समाज में अपने -अपने अलग-अलग दावे कर रहे हैं..
कोई ''गुरु'' है,तो,कोई ''धरमाधिकारी'',तो कोई ''भगवान''और अवतार.इतनी भीड़ देख कर ''परमात्मा'' घबरा गया. कि, अब तो कुछ करने के लिए बचा ही नही.सभी तो अपने-अपने सामर्थ अनुसार पूरा ताकत और क्षमता लगा कर कर ही रहे हैं,जो वो कर सकते हैं...और जो कार्य वो कर ही नही सकते वो कैसे कर सकते हैं..?..है ना...?...
परन्तु जब प्रदर्शन और प्राकृतिक जगत में प्रमाण की बात आती है तो,सभी एक स्वर से नपुंसकता के रूप में अपना परिचय स्वयमेव प्रमाणित कर देते हैं.सभी के पास अपने-अपने समाचार हैं,अपने-अपने काब्य हैं,अपने अपने साहित्य हैं,कहानियां हैं,कथाये हैं.अर्थात बहुत कुछ है संसार के पास.....बस समाधान नही है...
यह सब देख कर ''तुम्हारा भगवान और तुम्हारा परमात्मा'' पत्थरो में छुपा रो पड़ा.और ''मैं'',ने तुम्हारे देवी-देवताओं को अपनी विवशता पर रोते हुए देखा है.और उनकी विवसता देख कर हैरानी से अचंभित हो गया,मै..इन देवताओं को मंदिरों व् मूर्तियों में देख कर तथा शक्तिशाली धार्मिको के बंधन में पड़ा देख कर भी एक बार कुछ भी न समझ सका...
जिस जगत में एक पुजारी,एक धर्माधिकारी जब चाहे किसी भी दैवीय सत्ता को एक मूर्ति में प्राण डाल कर विवस कर सकता है और जब चाहे उस मूर्ति से प्राण वापस खिंच सकता है .तो, अब तो आज देवी- देवता इन मानवों का गुलाम होने चाहिए और इन प्राकृतिक दैवीय सत्ता का ज्ञान,परिचय,जान-पहचान तथा आज वर्तमान में किये जा रहे उन सबके कार्यो की जानकारी भी होनी चाहिए....?....
पर....इन सारे स्तरों पर मैंने सभ्यता और इन ठेकेदारों को पूरी तरह कंगाल पाया.किसी के भी पास उनके ही भगवान और परमात्मा या शक्ति का आज कोई परिचय,परिणाम तथा कार्य के बारे में जानकारी नही है..और अगर कुछ है तो सदियों ,युगों पुराना घटना का ही स्टाक है.लगता है, कि, आज भगवान,परमात्मा और शक्तियां मर गयी है,इनके ज्ञान में....
पहले मानव सभ्यता में ऋषि - मुनि व् तपस्वी हुआ करते थे.जो अपना जीवन और चेतना पूरा का पूरा वर्तमान मानव तथा प्राकृतिक में जगत में हो रही घटनाओं को जानने समझने और उससे सम्बन्ध स्थापित रखने में लगाते थे.जिससे आम जनमानस तक दैवीय सत्ता तथा दैवीय घटनाक्रम के बारे में सुचना और समाधार तथा सन्देश मील जाया करता था.....
आज जब हम स्वघोषित या पर -प्रत्यारोपित इन महान आज के स्वयंभू पहुचे हुए लोगो से जब पूछते हैं और जानने का प्रयास करते है तो हमे उत्तर में कागज के पन्ने पकड़ा दिया करते हैं और उपदेशो तथा शर्तों से अपना और साधारण जनता का सारा अनमोल जीवन नस्ट कर दिया करते हैं...
..
मिलता है क्या इससे इनको....?....
अकूत बैभव,संपत्ति,संपदा,दौलत,नाम,प्रसिद्दीऔर शिष्यों तथा अनुयायियों की भीड़....
इनका अपने को पुजवाने की तथा भौतिक संपदा को जी भर कर भोग लेने की आदिम और गहरी दमित ,अतृप्त इक्षा व् भूख पूर्ण होती है.
और मिलता है क्या इस सबसे आम जान मानस को....?...
एक सुनियोजित प्रचारित कार्य क्रम के तहत भ्रम.जिज्ञाशाओं के उत्तर में एक तिलिस्मिक शब्दों का ब्यूह बिलास...नृत्य सत्संग,उपदेश और मनोलुभावन कथा कहानियां .....ये हमे प्रेरित करती हैं,परमात्मा की ओर.हमारी स्मृतियों और चेतना में दैवीय सत्ता के बारे में जानकारी लेने,जानने की भूख पैदा करती हैं.पर समाधान नही दे पाती ...!..
आज जो जीवन में हम जी रहे हैं.हर ब्यक्ति अपना जीवन जी रहा है....
....
क्या ज्ञानियों के अनुसार,ज्ञानियों के ज्ञान प्राचीन घटना क्रमानुसार क्या आज इनका ''भगवान''परमात्मा''या दैवीय सत्ता '' मर चूका है.या फिर एक लम्बी छुट्टी पर चला गया है,अपने संतान,अपने भक्तो तथा जगत को छोड़ कर...?..जो आज की ताजा खबर ना देकर परमात्मा के बारे में बासी समाचार,कल की घटनाओं की सुचना परोसी जा रही है.......?..
हम क्या यह नही जान सकते इनके कारण की आज परमात्मा ,भगवान और दैवीय सत्ताये और शक्तियां कहाँ हैं तथा क्या कर रही हैं...?..
जगत में घटित और प्रचारित इन प्राचीन कृत्यों में देख कर इन सब कृत्यों से उत्पन्न एक भयानक भ्रम और नपुंसक नास्तिकता के परिणाम से संचित करने के लिए ''तुम्हारे परमात्मा'' ने ''तुम्हारे भगवान'' ने इन महान मानवों की भारी भरकम भीड़ से अलग एक सामान्य और साधारण मानव शरीरधारी को इस धरती पर एक माँ के गर्भ से जन्म देकर इस तरह अपने कार्य के लिए तैयार किया है की यह साधारण दो हाथ पैर का ब्यक्ति ''अघोर''अवस्था को प्राप्त कर सका..
और आज तक ज्ञात,अज्ञात मानव सभ्यता के इतिहास में जो आज तक ना तो सुना गया,ना ही देखा गया और ना ही कहीं पूर्व से चर्चा में हो.ऐसे गुणों और शक्तियों के स्वभाव वाला मनुष्य बनाया.
जो एक साधारण मानव के समान इनके बीच ही इस धरती पर जीना चाहता है.परमात्मा को अपने को ब्यक्त करने की इक्षा और उसके द्वारा निर्देशित कार्य को संपन्न करने तथा बंधन में पड़ी शक्तियों को मुक्त करा कर उनका साकार प्रमाणित प्रदर्शन करने के लिए निर्मित किया गया ''एक मानव''......
''
एक मानव'''!...जो प्रथम मानव शरीरधारी ''अघोर'' के नाम द्वारा सारा संसार जानेगा और अभी कुछ लोगो द्वारा जाना जाता है...परमात्मा ..''बिधाता'' बाबा श्री'' द्वारा जन्मा गया है.
इस ब्लॉग को ध्यान पूर्वक प्रारंभ से पढ़े और थोडा इंतजार करें......
अगर इस जगत में या किसी भी मानव शरीर धारी और अशरीरी ब्यक्ति को आज परमात्मा द्वारा,बिधाता द्वारा सम्पादित कार्य तथा कार्यक्रम के बारे में जानने की ईमानदार इक्षा हो,तो,एक मात्र मार्ग यही है की अभी इस ब्लॉग के माध्यम से संक्षेप में यहाँ ''मै'' संकेत तथा सन्देश और सूचनाएं दे दिया करता हूँ.....
मुझसे क्या मिलेगा.....?...
यह एक प्रश्न बनेगा तुम्हारे दिमाग में....?..
एक सबूत,एक प्रमाण मात्र..!...बस......!....
और तुम्हारे जगत तक तुम्हारे परमात्मा द्वारा किये जा रहे निरंतर कार्यो को पहुचाने का माध्यम बनने का ,कार्य संपादन करने का सौभाग्य.....
यह मेरा कर्तब्य है की आज भगवान और परमात्मा के कार्यों की सुचना तुम और तुम्हारे जगत तक पंहुचा कर उसके जीवित और क्रियाशील होने का प्रमाण दूँ....ताकि तुम्हारी आश्था,तुम्हारा बिश्वास पक्का हो सके.कोई उसे कमजोर ना कर सके.यह प्रमाण परमात्मा के जीवित होकर क्रियाशील होने का प्रमाण है.प्रकृति जगत में घटित हो रही परमात्मा ,बिधाता के आज के बिधान के अनुसार घटित हो रही घटनाक्रमों का सारे धरती पर सारे देश में ,सारी जाती और समस्त मानव सभ्यता में ,प्रकृति में आता जा रहा परिणाम है ....
पिछले वर्ष तथा कुछ दिनों पूर्व ''मै''ने अपने शिष्यों से तथा इस ब्लॉग में बोला था. की,
'''
काळ की गति बढ़ा दी गयी है.'''
तो देखो..!...
''''
धरती ने अपनी धुरी से अपना स्थान खिसकाकर समय की गति ,काल की गति को बढ़ा कर दिन को अब कुछ सेकण्ड ,क्षण छोटा कर दिया और परमात्मा के आदेश का पालन किया.''''
प्रमाणित हुआ ना की काळ की गति बढ़ गयी है.परमात्मा ,बिधाता का बिधान प्राकृतिक जगत और सभी प्रकार के जगत में समान रूप से लागु होता है...सभी को ही मानना ही पड़ता है...
धरती के लोगो ने अपने ही जीवन में घटित कृत्यों से उबकर युग परिवर्तन की प्रार्थना की तो बिधाता ने प्रकृति में परिवर्तन कर युग को परिवर्तित करना प्रारंभ कर दिया है...
--------
तुम क्या समझते हो....?.... कि, 21 दिसंबर .2012 की रात को एकदम से यह जगत हटा कर रातोरात कोई दूसरा जगत तुम्हारे सामने रख कर परोस दिया जायेगा..और तुमसे हाथ जोड़ कर यह प्रार्थना की जाएगी. कि,
''
हे महामानव अपनी आपनी आँखे खोलिए और इस नये सतयुग में आकर हमारा जीवन कृतार्थ कीजिये और इस जगत पर अहसान तथा मेहरबानी कीजिये...."..
''
मै'' पूछता हूँ आप सबसे ......! क्या कृत्य ,कर्म किया है इस जगत ने....?....कि,उसे रातो रात सतयुग में रखकर,सतयुग में परिवर्तित कर सतयुग को भी आज के इस वर्तमान कलयुग की तरह इतना दूषित कर दिया जाये और पापो से भर दिया जाये....?..''
क्या अपराध किया है सतयुग ने.....?...क्या आप अपने भगवान को इतना मुर्ख,बेवकूफ और वाहियात समझते हैं...?
..
अगर आपका भगवान जीवित है तो आप सभी की इक्षाओं,कामनाओ,कृत्यों,चालाकियों तथा कर्मो को जानता है....
...''
शिवपुत्र _एक मिशन'''.....के रूप में अभी इस जगत और प्रकृति को सम्हालने और सजाने का कार्य कर रहा है..इस विकृति हो चुकी प्रकृति और महाप्रकृति में परिवर्तन किया जा रहा है...
''
जब परम सत्ता कुछ करती है तो वह कार्य होता है...जागतिक ब्यवस्था में परिवर्तन करने का...'''
यह ब्लॉग बस एक थोडा सा प्रयास है.आपके परम सत्ता के बारे में,उनके कार्य के बारे में सूचनाएं पहुचाने का.जिससे यह एक विश्वसनीय सबूत के तौर पर काम आएगा और गवाह बनेगा,अपने हर एक बात की सत्यता का...
जगत प्रमाण मांगता है.बिज्ञान प्रमाण मांगता है एक-एक बात का...
यह प्रकृति मेरा है.ये प्राकृतिक शक्तियां जिसमे यह धरती लिप्त हुआ है,मेरी ''माँ'' है.और ''बिधाता'' जिसे मै अपने समस्त अस्तित्व से ''बाबा'' कहता हूँ.जिन्होंने अपना परिचय प्रमाणित करने के लिए अपने पुत्र का निर्माण किया है.पने ही जैसा बनाया है '''अघोर''.....
यह हमारे जगत में घटित हो रही घटनाओं की सुचना और सन्देश हैं...
आज बिधाता और बिधाता के कार्य संपादन और प्रमाणों का लिखित प्रमाण है.जिससे तुम अपने भगवान,अपने ईस्ट और परम सत्ता को मरा हुआ ना समझो.बल्कि जीवित होकर क्रियाशील होने का प्रमाण देख कर अपनी चेतना की आँखे,अपनी होश की आँखे खोल कर अपने आसपास,अपने साथ उसे महसूस कर सको....
आज वर्तमान में कुछ वर्षो से परमात्मा सशरीर इस धरती पर अपनी शक्तियों के साथ भारत के इस भू-खंड पर उपस्थित है.और अपने बिधान अर्थात इस वर्तमान जगत की मांग और आवश्यकता अनुसार कार्य कर रहा है...
------
तुम्हारे परमात्मा !.. तुम्हारे भगवान के पास नोट,रूपया और बैंक बैलेंस नही है,स्थूल भीड़ नही है.उनके पास पहला कार्य अपनी इस सृष्टि और धरती तथा प्रकृति को बचा लेने की है.....
न की उत्तर देने की और बहस करने की...
----
आज के लोग परमात्मा को अपनी T.V. स्क्रीन पर देखना चाहते हैं.परमात्मा के पास एक बहुत बड़ा सभी सुख सुबिधाओं से भरा आश्रम देखना चाहते हैं.बहुत बड़ा भीड़ उसके आस पास देखना चाहते है...भारी मात्रा में बैभव ,संपत्ति तथा धन देखना चाहते हैं...
वो तो चालक मानवों ने फैला ही रखा है.अपना-अपना आडम्बर तुम्हारे इन्ही धारणाओं के अनुसार ..
क्या तुम समझते हो की आज परमात्मा पहले अपना कार्य और बिधान अनुसार कार्य संपादन छोड़कर पहले रूपये कमाने और आश्रम बनवाने के लिए पाखंड तथा नाटक का सहारा लेकर टी.व्. पर आये.अपना प्रचार करे और तुमसे दान मांगे...?..
अपनी पूजा कह कर तुमसे करवाए..?..
क्या परमात्मा को ,भगवान को भिखारी समझे हो...?..
''
आज मानव शरीर धारी ''अघोर'' के पास धन और ईमानदार मानवों का अभाव है.जगत में कार्य करने के लिए जगत की भौतिक साधन की आवस्यकता सदा से ही पड़ती है.''
वर्तमान में.....''प्रथम मानव शरीर धारी ''अघोर'' प्रकृति और धरती को बचाने के लिए असुरो से भीषण युद्ध कर रहा है.???..
आर्थिक अभाव और साधन के ना होने से अपने पास उपलब्ध सिमित साधन के अनुसार इस ब्लॉग का उपयोग करते हुए मानवों तक आज के समय में परमात्मा के जीवित होकर कार्य करने का प्रमाणिक सन्देश देने का एक छोटा सा प्रयास किया जा रहा है...
साधन के अभाव में जो है उसे संक्षिप्त रूप में ही अभी परोस दिया जा रहा है.
यह मेरे जगत की बाते हैं.अगर आपका इस जगत का जरा सा भी सम्बन्ध होगा तो आपको आपके भगवान के जीवित होने और उसके कार्य के बारे में जानकारी इस लेख और ब्लॉग तथा शिवपुत्र एक मिशन के माध्यम से मिलती रहती है.आगे भी मिलती रहेगी.जो भी घटना होनी होगी उसके बारे में पहले ही बतला दी जाएगी..
माने या ना माने.इस तरफ से आप स्वतंत्र हैं....क्योकि किसी के मानने या ना मानने का गरज हमे या परम सत्ता ,बिधाता को नही है.मानने या ना मानने के लिए यह जगत,यह सभ्यता और सभी लोग पूरी तरह स्वतंत्र हैं....मनवाने का मेरे पास समय ही कहाँ है.
अगर यह बाते आपके जीवन में किसी भी तरह,किसी भी जगत या विचार से मिलती होगी,प्रमाणित करती होगी तो आपको अपने भगवान के जिन्दा होने पर जरा सा भी संदेह अब नही होना चाहिए...
अगर मेरी बात तथा मेरे जगत की घटना क्रम आपसे संयोग नही रखती तो आपसे ''मै'' क्षमा प्रार्थी हूँ.जो आपने मुझसे यह प्रश्न पूछा...?...
फिर आपका जगत मेरे जगत से अलग होगा.
.
इस सम्पूर्ण ब्रह्मंदिया खंड और जगत में मेरे जगत से अगर कुछ अलग है तो वो है सिर्फ ''सेकण्ड खंड ''...
मेरे ही अधीन होते हुए भी परमात्मा के बिधान को न ,मानने से सारा जगत उसे ''असुर जगत'' के नाम से जानता है.
और जहाँ तक मै जानता हूँ.आपके भगवान और परमात्मा का एक प्राकृतिक स्वभाव है की वो असुर तथा असुरों के कृत्य का बिध्वंस करता है.असुरों का समूल नाश कर देना शायद निश्चित ही आपके परमात्मा का स्वभाव है...है ना...!...
यहाँ सिर्फ समाधान है.उत्तर का मकड़ जाल नही...
आप सभी को,आप शरीरधारी हो या अशिरिरी..!. मेरा ह्रदय से प्यार लीजिये....
''
मै सभी को पहचानता हूँ और उनके ब्यक्तिगत / सामूहिक कर्मो से जानता हूँ...
परमात्मा ''बाबा'' बिधाता'' की शक्तियों के चलने की पगध्वनि अभी जगत में अपने सुमधुर तान,लय ताल में गुजनी शुरू हो गयी है...
''
मै'' ने ''बाबा'' का सिर्फ 'एक नाद'' बताया है....
.
देखो कल फिर 24 मार्च 2011 को शाम लगभग 08 बजे वर्मा ''म्यामार '' में भूकंप आया है...आगे देखते रहो...
''
मेरे पिता श्री ने,बाबा श्री ने धरती पर अपने पैर से चार बार प्रहार किया है.''
और ब्रह्मा जी को आदेश दिया है .की,
''
अब एक नये सृष्टि की रचना करो...''
और सारे जगत के साथ मै भी उत्साहित होकर देख रहा हूँ...
''
धरती के भीतर पृथ्वी तत्व में बिस्फोट हो रहा है और भूकंप आना प्रारंभ हो गया है.कल भी वर्मा .म्यामार में 7 या 6 .8 तीव्रता का भूकंप आया था....
और करना भी क्या है..?...कम से कम अपने जीवन में जब तक जीवित होने का बोध है.यह ब्लॉग पढ़ते रहिये,दुसरो को भी पढ़ते रहिये,पढने की प्रेरणा दीजिये..और ''शिवपुत्र एक मिशन'' द्वारा धरती की रक्षा,सभ्यता की रक्षा,धर्म की रक्षा तथा असुरो के बिध्वंस के लिए किये जा रहे कार्य के बारे में समाचार व् सुचना पर अपनी निगाह रखिये....
......................................
आप सभी को '''''धन्यवाद'''''.........................................
विशेष....
''
मै'' समझा पाया की नही..!..यह उतना महत्वपूर्ण नही है,बल्कि यह ज्यादा महत्वपूर्ण है की आप समझ सके या नही...!.
आपके द्वारा पूछे गये प्रश्नों के लिए मै सदा आभारी रहूँगा,आपका.जब कोई मुझसे मिलता है,कुछ कहता है और पूछता है तो मै समझता हूँ की इस ब्यक्ति के माध्यम से यह जगत मुझसे कुछ पूछ रही है.यह जगत अपनी कुछ जिज्ञाशाओं का समाधान मांग रही है..मेरे पास आये हुए हर एक ब्यक्ति को मै समाज जगत का एक प्रतिनिधि मानता हूँ.और इस परिपेक्ष्य में लेता हूँ की इस संसार और सभ्यता ने अपने एक प्रतिनिधि के माध्यम से अपनी एक प्रश्न या जिज्ञाषा का समाधान माँगा है,चाहा है..
इसीलिए आप मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं..
इस समय जगत में ''कालपुरुष बाबा श्री ''बिधाता'' द्वारा प्रकृति में परिवर्तन किया जा रहा है.यह ब्लॉग उसी के सम्बन्ध में है.
'
भौतिकता के अभाव में यह शिवपुत्र एक मिशन के कार्य का सबूत,प्रमाण छोड़ा जा रहा है.ताकि भविष्य में समय पर काम आये,कि परमात्मा ने प्रकृति परिवर्तन का कार्य प्रारंभ कर रखा है.
इस काळ खंड में हम अपने ज्ञान और अहंकार तथा जिद्द में बेहोश ना हों,बल्कि ध्यान पूर्वक होश में रहे...क्योकि कलयुग का अंत प्रारम्भ हो चूका है..प्रलयकालीन घटनाओं के अनुसार तत्वों के आपसी टकराहट द्वारा बिध्वंस की घटनाओ को अपनी आँखों से देख सकते हैं और अपने जीवन में भी घटित होते हुए सारा संसार,जगत देख सकता है...
.
अगर कोई ''बिज्ञान''रोक सकता है परमात्मा के इस कार्य को तो रोक ले.....
और क्या ......?...ब्यक्ति करे भी तो क्या.......?
..............................................................................

Wednesday, March 23, 2011

''' भारत के आसपास उत्तर में हिमालय हिल (भूकंप आ रहा है) रहा है.''


...23 .मार्च...2011 ..
''
सावधानी,समझदारी से अपनी आँखों से देखो.!
.
भारत भूमि..!..इस देश के आसपास धरती में हलचल ( लगातार भूकंप आ रहा है.)हो रही है.''
'''
भारत के उत्तर पश्चिम और उत्तरी सीमा पर हिमालय क्षेत्र के उस तरफ भूकंप आना शुरू हो गया है...और इस देश के बुद्धिजीवी तथा जागरूक और बैज्ञानिक ,तथा जिम्मेदार लोग अपनी आँखे बंद कर बहस में उलझे हुए हैं.....''
'''18 .
मार्च.2011 ..के इस ब्लॉग के लेख में लिख दिया गया है,की बाबा ने धरती पर अपने पैर से चार बार प्रहार किया है.''
क्या यह धरती के निचे लगातार हो रही हलचल और मानव सभ्यता तक आ रही प्राकृतिक सूचनाएं हमे कुछ संकेत नही करतीं...?..
18 .
मार्च.2011 ...से मध्य पूर्व में युद्ध भड़क गया है.एक कमजोर स्वतंत्र राष्ट्र पर कुछ बाहुबली राष्ट्रों ने जबरदस्ती घुस कर नागरिको का नरसंहार शुरू कर दिया है.
'''
यह कहानी नही है..!..यथार्थ है...!..''
'''
युद्ध भड़क चूका है.घमंडी राष्ट्रों ने अपना शक्ति प्रदर्शन पुन: प्रारंभ कर दिया है.''
''21
मार्च 2011 को दोपहर बाद किसी समय में भूकंप के झटके पुरे उत्तर भारत में महसूस किया गया.भारत के आसपास उत्तर पश्चिम में ''हिन्दूकुश'' पर्वत की ओर अफगानिस्तान में इस भूकंप का केंद्र था.दिल्ली सहित सारे उत्तर भारत में महसूस किया गया.अभी हल्का झटका है...
...
आज 23 मार्च.2011 को फिर चीन और कश्मीर सीमा पर अर्थात भारत के उत्तर में हिमालयीय क्षेत्र में 5 .1 तीव्रता का भूकंप आया.नुकसान का समाचार अभी विस्तार से नही मिल पा रहा है...
.....
क्योकि भारत का भाग्य अभी क्रिकेट के भरोसे आश्रित कर छोड़ दिया गया है.
....
और देश तथा संसद में चर्चाएँ और बहस,आरोप ,प्रत्यारोप का ड्रामा चल रहा है...
.
विकास शील तथा धर्म निरपेक्ष देश भारत..!...अभी विकसित देश जापान की दशा देख कर भी कुछ सिखा नही है.यहाँ पर जीवन का मूल्य आम आदमी का बस इतना ही तो है न,जितना की,भोपाल में गैस त्रासदी में हर मृतक ब्यक्ति को 20 --25 साल बाद दिया गया मुआवजा है,कुछ सौ रूपये...?..
ठीक भी है.भारत का नेतृत्व और बुद्धिजीवी तबका जापान से कुछ ज्यादा ही देश भक्त और विकासशील है.
पर क्या कीजियेगा...?..
प्रकृति का कार्य चालू है,प्रकृति में परिवर्तन का कार्यक्रम प्रगति पर है...अभी 2011 है.अगले साल 2012 है.और फिर 2013 आएगा .इस धरती के टुकड़े पर जहाँ हम भारतीय कहलाते हैं.यहाँ जान और जीवन सस्ता है।और भारत के आस पड़ोस उत्तरी,उत्तर पश्चिमी तथा उत्तर पूर्व की सीमा पर धरती के निचे भूकंप आ रहा है...
....
बाबा ने धरती पर अपना पैर पटका है,क्योकि भगवान बिष्णु जी ने अपने हाथो से पकड़ा हुआ बाबा का पैर अब छोड़ जो दिया है...
और मेरे पिता श्री बाबा जी ने श्री ब्रह्मा जी को आदेश दिया है...
'''
अब एक नये सृष्टि की रचना करो. '''
पैर पटकने के पश्चात बाबा श्री एक गहरी समाधि में है.भयानक तूफान के पूर्व की ख़ामोशी फैली है...
जगत का ज्ञान और विवेक स्तंभित है.और भारत की सीमाओं पर उठ रहा भूकंप का धक्का भारत के अन्दर तक महसूस किया जा रहा है.आधुनिक यन्त्र तीव्रता नापने में लगे हुए हैं और सूचनाएं क्रमश : आता जा रहा है.
11
मार्च 2011 के जापान में भूकंप और सुनामी के बाद भी भूकम्पो के आने का सिलशिला लगातार जारी है..
याद रहे....!...जापान भारत के पूर्व में ( उत्तर पूर्व में ) स्थित है.और दिन का प्रारंभ पूर्व से ही होता है.पूर्व से हिमालय तक भूकम्पो का सिलशिला
प्रारम्भ हो गया है.
विशेष....आज का अत्याधुनिक समाज और बिज्ञान ईन्तजार ,अटकले ,अनुमान ,बहस और चर्चाओं के अलावा कर भी क्या सकता है...?..
चलो..! सबके साथ ''हम'' भी देखते हैं.....!...

Saturday, March 19, 2011

''धरती पर अपने पैर से प्रहार के पश्चात ''बाबा श्री'' गहरी समाधि में है.'' ...किसी बड़ी घटना के पूर्व कि ख़ामोशी बनी हुयी है.




Dt ...19.march.2011....रात में 9.00pm ..

'''23 अगस्त.2009 ----31 अगस्त 2009 ..के मध्य का कल मैंने जिस घटना का जिक्र किया था.कि,भगवान बिष्णु जी ( श्री बदीनाथ जी.) बालरूप में बाबा श्री के दोनों पैरो को अपने दोनों हाथो से पकड़ कर बाबा को शांत रहने के लिए मना रहे थे.वो अब बाबा का पैर छोड़ कर उठ गये हैं.. ''
''2009 के पश्चात में 2010 में हिमालय को हिलते हुए सारे जगत ने देखा है.अनेकानेक बार भूस्खलन,लैंड स्लाइडिंग और बार-बार बादल के फटने तथा घनघोर बरसात से हिमालय से नीचे धरती की ओर जल प्रवाह का जो वेग बरसात के समय चीन,पाकिस्तान,तथा भारत सहित दुनिया के अन्य कई नगरो ,आबादियों में फैला.उसने अपना परिचय खुद दे दिया था,की अभी इस धरती पर हिमालय जिन्दा है...''
...और....धरती का पुरुष अभी जिन्दा है..धरती का पुरुष जाग रहा था....
''और......बाबा की समाधि टूट गयी...'''
परसों जैसे ही ''भगवान श्री बिष्णु जी'' ने ''बाबा श्री'' का अपने हाथो से पकड़ा हुआ पैर छोड़ा.
''बाबा श्री'' ने विकराल विराट ''काल पुरुष'' का रूप धारण किया.
''बाबा श्री'' के खुले हुए बिखरे बाल ब्रह्माण्ड में लहराने लगे.बड़ी-बड़ी लाल आँखे रक्त वर्ण की हो गयी.जिह्वा लपलपा उठी और धरती पर ''बाबा श्री''के इस रूप ने चार बार कठोर प्रहार किया.....
''कल रात से ही ''बाबा श्री'' गहरी समाधि में चले गये है तथा गंभीरता का भाव बना हुआ है.''
....2009 में ''बाबा श्री'' ने बतलाया था .की,
''इस बार के कार्य में अनेक दानवों तथा असुरो का भी सहयोग लिया जायेगा।जिन्होंने कभी अपनी तपस्या भक्ति से जगत और मानवता की सेवा की हो और प्रसिद्धि पाई तथा परमात्मा के कार्य के निमित्त अपना सर्वस्य सौंप दिया है.''''
''अपने पैर से चार बार धरती पर प्रहार करने के पश्चात बाबा गंभीर समाधि में बैठ गये हैं.ऐसा लगता है की धरती पर कुछ बहुत बड़ी घटना होने वाली है.बहुत बड़े तूफान के पूर्व की खामोश शांति.'''
..अपने आसन पर बैठे बाबा श्री अपने पैर से धरती को निरंतर दबा रहे हैं...
...जिससे दानव राजा बलि ..!...
..जिसको बाबा ने अपने पैरो से दबा कर रखा था,अभी तक.उसे दबा कर नीचे से ऊपर आने का प्रयास कर रहे हैं.....
आज सारा दिन बाबा का समाधि में ही निकला.
एक बहुत बड़ी घटना के पूर्व की ख़ामोशी बनी हुयी है.सारा दिन पैर से अपने नीचे ही प्रेशर दे रहे हैं...
एकदम खामोश ही दिन भर बैठे रहे हैं,''पिता श्री..बाबा जी...''
क्लाक वाईज गोल चक्रवात जैसा प्रेशर बन रहा है.जापान से लेकर हिंदुस्तान तक कुछ हो सकता है.चक्रवात जैसा बन रहा है.गोल-गोल सब एकदम सा घूम रहा है.किसी को नही मालूम,बस बाबा को ही मालूम है.
बहुत बड़ा कुछ होने को है.
कहाँ होगा,कब होगा पता नही चाल पा रहा है..
''बस बाबा की ख़ामोशी गंभीर है.''
देखते हैं धरती पर,प्रकृति में क्या होता है..?
बस इतना ही कह सकते हैं की किसी बड़े घटना के घटित होने के पूर्व जैसी भयानक ख़ामोशी है यह...
लोग और जगत अपनी मस्ती में चल रहे हैं.
सावधान रहने की जरूरत है.क्योकि धरती अपनी धुरी से हट कर खिसक चुकी है.. और काल की गति पहले की अपेक्षा बढ़ चुकी है.
प्रकृति में तो प्राकृतिक बिघटन ,बिखंडन और तीव्र परिवर्तन तो होगा ही होगा...
धरती के भीतर पहेल ३-४ साल से जो अधोमुखी उल्टा ट्राइंगल निर्मित हुआ था.
अघोमुखी ,उल्टा त्रिकोण को जाग्रत कर मुक्ति करने के पश्चात उर्ध ट्राइंगल होकर अपना स्थान परिवर्तन किया था.उसके पश्चात से उस धरती के भीतर वाले उलटे त्रिकोण में तीव्रता से कम्पन बढ़ता ही जा रहा है.तथा बीच-बीच में कोणीय अवस्था भी बदलती जा रही है.
...देखते हैं...मानवों के कर्मो के कारण धरती के भाग्य में क्या लिखा हुआ है.?.
... .और कौन-कौन सी सभ्यता समाप्त होती है...

...वादा अनुसार धरती की रक्षा के लिए और नये सृष्टि रचना के लिये निरंतर प्रकृति में तीव्रता से परिवर्तन किया जा रहा है..
सावधान ! प्रकृति अब मुक्त व् स्वतंत्र है.
प्राकृतिक जगत में घटित हो रही तमाम तरह की घटनाएँ ..
''माँ''..मेरी माँ ....मूल महाशक्ति ..का अपने सभी शक्तियों के साथ चलने फिरने की ''पगध्वनि'' है.
...धरती पर पग प्रहार के बाद ''बाबा श्री'' की लगातार गंभीर ख़ामोशी का राज क्या है....?....और परिणाम क्या आता है....?

Friday, March 18, 2011

''बाबा'' ने ''धरती'' पर अपने ''पैर से चार बार प्रहार'' किया.



Dt ..18 march।2011..night..10.10.pm.Delhi ..Aashram.
''सावधान ...सावधान....सावधान....''

''एक विशिस्ट घटना की निश्चित
संभावना बन गयी है.''
''मानव शभ्यता के ईतिहास में और ज्ञात स्मृतियों तथा शाश्त्रो में वर्णित ''बाबा''' ..'''आदि पुरुष ''' से सम्बंधित यह घटना इस धरती के जगत के लिए अति महत्वपूर्ण है...''
आज के हो या प्राचीन काल के .मानवों का यह स्वभाव रहा है कि देख कर भी नही मानते हैं.इसी ना मानने के गुण स्वभाव के कारण इन्हे मनुष्य कहा जाता है.यह सारी धरती पर हर जगह मिलते हैं.और अपने स्वभाव से स्वर्ग को भी नरक बना देने का सामर्थ्य रखते हैं......
घटना..!..जिस घटना का मै जिक्र करने जा रहा हूँ.उसका सम्बन्ध सभ्यता के आदि काल से लेकर आज वर्तमान जीवन तक है और जब भी इस धरती पर सभ्यताओ की कहानी मिलती रहेगी और जीवन रहेगा तब तक रहेगा...
युगों की घटना लम्बी है.समय कम... स्थान... छोटा है.
यहाँ पर यह मेरा लेखन एक सुचना और सन्देश मात्र है.यहाँ मानव जाती के बुद्धिजीवियो के लिए.इसमे तर्क के लिए स्थान और समय नही है..क्योकि यह ''यथार्थ'' है..वर्तमान में.आज के जगत /संसार में घटित हो रहा है.....
..जिसे समझना होगा ,समझ जायेंगे.मजाक उड़ाने वाले ,अपने जीवन का मजाक उड़ाने के लिए पूर्ण रूप से स्वतंत्र हैं.....
''''2009 ...के अगस्त में हम जब केदारनाथ--हिमालय में प्रवास कर रहे थे.अपनी बेटी के साथ.तब मेरे पास मेरे शिष्य डाक्टर अश्विन और डाक्टर अल्पा भी आये...साथ में बाम्बे से मन्नू तथा सुमन भी थे...
मैंने ध्यान में ले जाकर अश्विन को कुछ दृश्य व् घटनाक्रम दिखलाया था...
मेरे पिता श्री '''बाबा'' भगवान शिव जी केदार नाथ जी .अत्यंत क्रोध में बैठे हैं.उसी के कुछ दिनों पूर्व मै 14 अगस्त 2009 को श्री बद्रीनाथ जी को वहा के मंदिर से अपने साथ मुक्त करा कर बाहर लेकर 15 अगस्त 2009 को चला आया था .तथा शाम को ऊखी मठ ठहरा था.और १६ अगस्त २००९ को ''मै'' और रूचि केदार नाथ पहुंचे थे.
यह वर्णन 20 अगस्त 2009 और 31अगस्त 2009 के मध्य का यहाँ वर्णित कर रहा हूँ.
डाक्टर आश्विन को आने पर मेरे पास मैंने दिखाया.......

प्रकृति में इस वर्तमान अवस्था के लिए भगवान बिष्णु जी ( बद्रीनाथ जी) ने सभी देवी-देवताओ को दंड दिया और दंड स्वरुप ब्रह्माण्ड का सात चक्कर लगाने का आदेश दिया...
वर्तमान कलयुग में देवी-देवताओ ने सिर्फ अपने अधिकार का भोग किया.
आदि शक्ति ''माँ'' की मुक्ति के बाद भी माँ के पुत्र और माँ को बहुत अपमान सहना पड़ रहा था...
बिष्णु जी ने ब्रह्मा जी के यह कहने पर की .......
''''अभी इस सृष्टि को रहने दिया जाये..आप अपना धर्म निभायिये.आपका धर्म पालन करना है.सृष्टि का आप क्यों बिध्वंस करना चाहते है...?..हम सबने मिल कर इस जगत ,इस सृष्टि को बनाया है,किसी विशेष प्रयोजन से.'''
इस बात पर बिष्णु जी भड़क गये और ब्रह्मा जी को बोला......
'''आप अब एक नये सृष्टी रचना की तैयारी कीजिये...'''
'''बाबा श्री'' बहुत क्रोध में थे क्योकि माँ और अपने पुत्र का बार-बार अपमान देख कर बाबा इस जगत का बिध्वंस कर देना चाहते थे.इसीलिए बार-बार अपने आसन से उठने का प्रयास कर रहे थे.अपने आसन से बाबा उठ जाना चाह रहे थे.फिर बिष्णु जी बाल रूप में बाबा का पैर पकड़ कर बैठ गये.और ''बाबा'' को अभी शांत रहने के लिए प्रार्थना करने के लिए कहने लगे....
''मेरी माँ आदि शक्ति ''कामख्या ''एक तरफ बाबा के चुपचाप खड़ी हो कर सब कुछ देख रही थी .
फिर धीरे से कुछ बोला,ब्रह्मा जी से की ,,,,,
''अभी मै ही कुछ करता हूँ..आप अपने सृष्टी में कुछ फेर बदल कीजिये..''
उसके बाद 31 अगस्त को हम सभी लोग केदार नाथ जी से निचे उतरे और शाम को बाबा नारायण गिरी जी से गुप्त काशी में मिल कर ऊखी मठ पहुंचे .जहाँ पुजारी ने हम सबका स्वागत किया और अपने आवभगत से हमारा सत्कार किया..
01 .SEP .2009 ...को डाक्टर अल्पा का जन्म दिन था.पुजारी के घर हम सबको भोजन कराया गया.साथ में पुजारी के एक मेरी अन्य शिष्या भी थी.हम छः लोग.निचे की और यात्रा पर चल दिए.
मेरे साथ मेरी कार में मेरी बेटी रूचि,डाक्टर अश्विन,डाक्टर अल्पा थे.पीछे बस में मन्नू और सुमन भी थे..हमे छोड़ने पुजारी और मेरी एक अन्य शिष्या आये थे बस स्टैंड तक ,ऊखी मठ में,..

जो प्लेट मेरे सामने पुजारी ने परोसा था.वो रोटी एक अति भयानक जहर मीठी जड़ी से बनी हुयी थी.

और देव प्रयाग...उत्तराखंड में 01 SEP 2009 को ''मै ''''प्रथम मानव शरीरधारी 'अघोर'' पुजारी के घर खिलाये गये रोटी के भयानक जहर के प्रभाव से मै मर गया.
इससे सम्बंधित कुछ-कुछ घटना क्रम बिच-बिच में घटना क्रमानुसार मैंने इस ब्लॉग में लिख दिया है...
कल से कुछ महत्वपूर्ण घटना क्रम हो रहा है...
सम्पूर्ण जगत और सभ्य
आधुनिक समाज को आज मालूम है की जापान में 11 मार्च 2011 को भयानक भूकंप और फिर सुनामी ने बर्बाद कर दिया.फिर ज्वालामुखी और अब रेडिओ एक्टिव तत्वों का विकिरण प्रारंभ हो गया है.....
(1 ) ....एक शिष्य ने ध्यान में कल देखा..
भारत के पश्चिम दिशा के देश की तरफ से काला करेंट पूर्व में ( जापान की ओर ) जा रहा है. धरती से आकाश तक बैज्ञानिक अपना कुछ सिस्टम लगाये हुए हैं.उस पुरे सिस्टम को प्रकृति में ही कुछ विशेष तरह के करेंट उसे चारो तरफ से घेर कर अपने अन्दर ढक ले रहे है.
(2 )....केदार नाथ जी में जो ''बाबा '' का पैर पकड़ कर बाल रूप में श्री बिष्णु जी अभी तक बैठे हुए थे.वो पैर छोड़ कर कल वो उठ गये हैं. और बाबा ने अपने आसन से उठ कर अपने उस पैर से धरती पर चार बार प्रहार किया है.बाबा अपने विकराल रूप में हैं.बाल खुले तथा फैले हुए हैं.जीभ लपलपा रहा है.आँखे लाल -लाल ,बड़ी-बड़ी है तथा प्रचंड क्रोध से भरे हुए हैं...
तथा ब्रह्मा जी को आदेश दिया है की ......
''''फिर से सृष्टि की रचना लिखो..''''
''बाबा'' के पीछे चारो तरफ अपने हाथ जोड़ कर सभी देवी-देवता खड़े हैं...

विशेष---यह एक विकट परिस्थिति है.मै कई वर्सो से धरती की संतुलन को सम्हालने का जी तोड़ प्रयास कर रहा हूँ. हिमालय के उस तरफ धरती के निचे और धरती के ऊपर प्रकृति में कुछ हो रहा है.
पिछले कुछ वर्स से चीन,यूरोप,आस्ट्रेलिया,पाकिस्तान आदि सभी धरती पर चारो तरफ देशो में सभी देख ही रहे हैं.
भारत के पूर्व दिशा में,उत्तर पूर्व दिशा में,तथा उत्तर दिशा तथा पश्चिम में बहुत जल्द ही कुछ भयानक होगा...जिसमे जापान,चीन,रूस,बियातनाम ,मंगोलिया,थाईलैंड,वर्मा ,वियतनाम अमेरिका,यूरोप तथा एशिया और एशिया के मध्य (मुस्लिम आदि देशो में) आदि अनेको देशो में प्राकृतिक विप्लव तथा बिध्वंस घटनाक्रम बहुत तीव्रता से घटित होने की संभावना बनती जा रही है....
प्राकृतिक तत्वों के आपसी टकराव से धरती पर भयानक प्राकृतिक बिध्वंस से ब्यक्ति गत ,प्राकृतिक ,तथा सामूहिक टकराव,राजनितिक स्थिरता और भयानक गृह युद्ध कि स्थितियां बनती जाएँगी और युग अपने अंत की और तेजी से बढ़ता ही जायेगा.
बाबा का अपने आसन से उठ जाना और बिष्णु जी का अब पैर छोड़ देना,बाबा का.... कुछ सन्देश दे रहा है तथा खुलेआम संकेत कर रहा है.यह दृश्य बहुत कुछ कह रहा है.और फिर बाबा श्री का धरती पर अपने पैर से चार बार प्रहार करना बहुत जल्द ही ,निकट कुछ दिनों में बहुत बड़ी प्रलयात्मक घटना का संकेत है.
खुले आम प्रकृति में यह सब हो रहा है...
और सभी बुद्धि जीवी तथा ज्ञानी लोग अंधे की भांति अपनी आँखे खोल कर देख रहे हैं.....
यही तो है परमात्मा का साकार प्रमाण....
मेरे ख्याल से बहुत हो गया.परमात्मा अब सहने के लिए तैयार नही है.. कल युग का अंत काल प्रारंभ हो ही चूका है.
''सावधानी से अपना -अपना ''यथार्थ धर्म''निभायें .''
..सभी स्वतंत्र है.परिस्थितियों में विकटता प्रारंभ हो ही चूका है.अपने अभी तक के ज्ञान की पूरी परीक्षा पिछले किसी लेख में इसी ब्लॉग में दी गयी दो-तीन प्रकार के त्रिकोण -ट्राइंगल के मैप बना कर दिए गये चित्र को देख समझ कर ,कर लेवे....
.भारत का दुनिया का भाग्य उस मैप में रेखांकित कर दिया गया है.
आपको समय-समय पर सुचना और सन्देश दे दिया जायेगा....
सावधान__सावधान__सावधान...

Sunday, March 13, 2011

...''माँ'' ....महा शक्तियों ..के चलने की मधुर ''पगध्वनि'' निरंतर सुनाई देने लगी है''.. ( यह प्रलय की खुले आम आहट है.कान लगा कर सुनो और आँख खोल क

......जैसा की हमने गुजरात जाने के पहले ही अपने फेशबुक में लिख दिया था की, ''मुझे भारत में दिल्ली के पश्चिम दिशा में जाने से धरती के प्रकृति में ,जाग्रत ट्राइंगल से सम्बंधित कुछ देशो में तीव्र परिवर्तन जैसे भूकंप ,अग्नि ,जल बिध्वंस आदि की घटना संभव हो सकती है.क्योकि मेरे आदि शक्तियों के साथ विकृति प्रकृति को मूल प्रकृति में परिवर्तन के लिए गतिमान होने से तत्वों में टकराहट बढ़ने लगती है ,धरती के मैग्नेटिक फिल्ड पर दबाव पड़ता है.हमारे चलने फिरने से जाग्रत त्रिकोण के अवस्था में परिवर्तन होने लगता है...इससे भूकंप,जल प्रलय,वायु प्रलय आने की तुरंत संभावना बनने लगती है...
मै 17 .feb से 26 feb 2011 तक गुजरात के दाहोद शहर में था.इसी बिच न्यूजीलैंड में भूकम्प की घटना घटित हुयी.
02 .मार्च 2011 को ''महा शिवरात्रि '' पड़ने से मुझे तुरंत वापस दिल्ली आना पड़ा.महाशिवरात्रि पर ''बाबा'' का महाभिषेक करना था.और 03 .मार्च 2011 को यहाँ आश्रम पर भंडारा था..
..महाशिवरात्रि और भंडारा का प्रोग्राम बहुत ही धूम धाम से संपन्न हुआ.
इसी बिच अचानक प्राकृतिक दबाव पड़ने से मौसम में अचानक परिवर्तन होने लगा.......बारिस के साथ ठंडक बढ़ने लगा.मौसम मेरे अनुकूल हो गया था.
''बिधाता''....बाबा के आदेशनुसार मुझे अब अपने जाग्रत त्रिकोण के एक कोण पर ,काशी [ बनारस] के लिए जाना था.तुरंत दिल्ली से काशी जाने का आदेश पाने से मै अपने कुछ शिष्यों को ही इस यात्रा के बारे में बतलाया .और अपनी बेटी के साथ मै काशी की ओर
.. निकल पड़ा..
मेरी अपनी उपस्थिति अब माँ तथा सभी शक्तियों के साथ अब अपने जाग्रत त्रिकोण के एक मूल एंगल ,कोण काशी पर स्थित हो चूका था जिससे दिल्ली के कोण पर भार हल्का पड़ने लगा था. भारत के पूर्वी भाग पर दबाव बढ़ने लगा था और ..इसके परिणाम स्वरुप भारत के उत्तर पूर्वी और पूर्वी भाग पर धरती के भीतर दबाव के साथ झटका लगने लगा....
मैंने ब्लॉग में अपने पहले के लेख में भी बार-बार कई अन्य जगहों पर लिखा हुआ है की मेरे साथ महाशक्तियो के चलने फिरने से ,माँ की पग ध्वनि सुनाई पड़ती है....मिसन के गुप्त प्राकृतिक कार्य के जिस उद्येश्य से मै काशी के लिए निकला था ,उस कार्य में रूचि के उर्जा सर्किट पर तीव्र दबाव बढ़ने से उसको तेज ज्वर हो गया.....
मैंने कई दिनों तक धरती के भीतर के गुरुत्वाकर्षण के बैलेंस को चेक करने के बाद अचानक बाबा के आदेश पर काशी क्षेत्र से बाहर निकलने का और काशीक्षेत्र को तुरंत छोड़ने का निर्णय लिया ।और किसी भी तरह
दिल्ली वापसी यात्रा की ब्यवस्था की .....
11 .मार्च .2011 .को मै अपनी बेटी....मूल महाशक्तियों के साथ झारखण्ड संपर्क क्रांति ट्रेन से दिन के 9 बजे मुग़लसराय से अपने वापसी यात्रा दिल्ली के लिए शुरू की.बुखार में रूचि कमजोर लग रही थी .थकी सी.मैंने कुछ दवा देकर उसे सुला दिया था और कुछ समाचार आने का इंतजार करते हुए अपने बर्थ पर लेट कर आराम करने लगा......
तभी दोपहर में मेरे एक शिष्य डाक्टर अश्विन का फोन आया....
'''जापान में 8 .9 तीव्रता का भूकम्प आया था.और लगभग ३० फुट ऊँची सुनामी की लहरे लगातार उठ रही थी तथा जापान को बर्बाद कर रही थी......सचमुच मेरी माँ अर्थात महाशक्तियों के चलने फिरने जो पगध्वनि जगत में उठती है,वो बड़ी ही भयावह होती हैं....
लेकिन परमात्मा भी क्या करे..?.. जगत के प्राकृतिक संतुलन के लिए छोटे मोटे इस तरह की घटनाओ के चक्कर में अपना कार्य तो नही रोक सकता ना.और कार्य भी क्या...?....विकृति प्रकृति को मूल प्रकृति मे परिवर्तन का कार्य.यह धरती की रक्षा के लिए जरूरी भी तो है.नही तो आधुनिक बिज्ञान के नाम पर जिस तरह से प्रकृति से छेड़ छाड़ हुआ है उससे तो सारी धरती ही विनास के कगार पर बढ़ती ही चली जा रही है.....
अध्यात्म और धर्म के प्रसिद्द लोग अपने सभी कर्मो से ,अपने आश्रमों से,अपने उपदेशो से सारे जगत को सतयुग में प्रवेश कराने के लिए अपना सारा जोर लगा रहे हैं. ...सभी लोग सतयुग में घुसने के लिए अपना सारा जोर इन सबके पीछे से अपने जिन्दगी का बहुत ही कस कर जोर लगा रहे हैं....
सतयुग में सभी लोगो को ले जाने का दावा करने वाले ये लोग अपने -अपने प्रयास में पूरी तरह लग गये हैं॥कारोबार और ब्यापार पूरी तरह चालू है। इस बेचारे कलयुग को ये लोग जबदस्ती ही सतयुग में धकेलते हुए ले जाने का अपना-अपना दावा ठोकने वाले लोग शायद यह सोचना तक भूल गये हैं की जबतक कलयुग है तब तक इतने भारी भरकम युग को कैसे और कहा ले जाकर सतयुग में रखेंगे...?..
ये ज्ञानी लोग हैं और इनके पास भारी भरकम शब्दों की भीड़ है जिसमे भोले भाले लोगो को बहला और बहका कर अपना धंधा बखूबी चल रहे हैं.
दया आती है इन ज्ञानियों और पहुचे हुए लोगो की भीड़ को देख कर.....
ये सत्य है की ये सारे अपना पूरा जोर लगा कर कलयुग को सतयुग में लेकर चले ही जायेंगे..???...
लेकिन किसी ने भी कलयुग से ये नही पूछा की वो सतयुग में जायेगा भी की नही.कलयुग सतयुग में परिवर्तित होगा भी की नही...इसकी जरूरत किसी ने भी नही समझी और न ही इसके बारे में कुछ भी सोचने तक का सामर्थ अपने अन्दर उत्पन्न किया.....?.
जब तक कलयुग रहेगा ,तब तक सतयुग कैसे आएगा.?..धकेलने का प्रयास सभी कर रहे हैं...!
जब कलयुग का अंत होगा तभी तो यह युग सतयुग में परिवर्तित होगा.कलयुग के अंत होने पर ही सतयुग आने की संभावना बनती है.
इसीलिए ''बिधाता'' ने सबके ,सारे संसार में बढ़ती हुयी इस मांग को देखते हुए की ''कलयुग का सतयुग में परिवर्तन और प्रवेश होना चाहिए''.
की पूर्ति के लिए कलयुग का अंत करने का निश्चय कर लिए और धीरे-धीरे करके कलयुग का अंत करने लगे....
कलयुग के अंत होने की इसी प्रक्रिया का एक भाग न्यूजीलैंड में भूकम्प का आना,जापान में भूकम्प का आना और सुनामी का आना ,ज्वालामुखियो का अपना मुख खोलना इत्यादि तथा ऐसे ही प्राकृतिक तत्वों के आपसी टकराहट और बिघटन के परिणाम से उत्पन्न घटनाये हैं.पिछले तिन से चार वर्सो से आप अपने चारो तरफ की धरती पर प्राकृतिक हलचल और तीव्र होती जा रही बिध्वन्सक घटनाओ को देख कर मेरी बातो को समझ सकते है.ये सीधा ईशारा करते हैं , कलयुग का अंत प्रारम्भ किया जा चूका है. ताकि सभ्यता के ठेकेदार लोग जो बच जाये उसे लेकर सतयुग में जा सके.....
कार्य क्रम अभी जारी रहेगा. बिध्वंस की घटनाये पिछले की अपेक्षा तीव्र गति से बढ़ती ही जाएगी....
यह तो माँ की पगध्वनि से उठा हुआ मधुर संगीत है....जिसे सुनने के लिए सारे जगत अपने-अपने कर्मो से खुद ही वीवस है.क्योकि कर्म ऐसा ही तो उसने ही किया है..........
मैंने पिछले ब्लॉग में लिखा है ना की,''प्रथम मानव शरीर धारी ''अघोर'' शिवपुत्र ''' ने कलयुग में अपने माँ की मूल महाशक्तियो को प्रदर्शित करने का काम चालू कर दिया है और समय की गति,काल की गति बढ़ा दी गयी है.....प्राकृतिक तत्वों का फिरसे एक बार पुन: समायोजन और संतुलन का कार्य प्रारम्भ है......
ऐसे महत्वपूर्ण कार्य को करने में लगे हुए ''अघोर'' से छेड़ छाड़ करना ठीक नही है .अन्यथा महाशक्तिया कुपित होकर महाप्रलय प्रारंभ कर देगी और मेरे पिता श्री के तांडव के बारे में सभी ने कुछ ना कुछ सुन ही रखा है......
धैर्य के साथ इंतजार कीजिये.आप सभी के सामने महाप्रकृति में सारे कार्य क्रम समय-समय पर यु ही परोस कर प्रस्तुत कर दिए जायेंगे....
धन्यवाद्....
विशेष---- कार्यक्रम चालू है,कार्य की गति बढ़ती ही जाएगी......किसी को भी निरास नही होने दिया
जायेगा.सभी अपने-अपने कर्म फल के पुरे . .
अधिकारी हैं...............प्रलय खंड में जब प्रवेश होता है,तो शुरुआत भी ऐसे ही प्राकृतिक बिध्वंस से ही होती है...


Saturday, February 5, 2011

''बिधाता ''बाबा'' ने बिधान में 'परिवर्तन' कर दिया है''


''मै'' प्रथम मानव शरीरधारी ''अघोर''बोल रहा हूँ.
मुझे प्रकृति में परिवर्तन करना ,नियंत्रण करना और सञ्चालन करना अच्छा लगता है...
प्रकृति की मूल शक्तियों को मुक्त करा कर उनका स्वतंत्र प्रदर्शन कराना अच्छा लगता है...

मै ''यथार्थ '' हूँ ..''सत्य'' या ''झूठ'' नही...यही मेरा ''स्वभाव'' है...
''मै'',''युगों'' और सभी ''धर्मो'' का गवाह हूँ...सब मेरे ही सामने घटित हुआ है,नस्ट हुआ है और फिर पुनर्निवित भी हुआ... अभी ''प्रकृति परिवर्तन'' का कार्य तेजी से किया जा रहा है.और ''काल'' की गति तीव्र कर दी गयी है.. ''बंधन में पड़ी हुयी मूल शक्तियों को स्वतंत्र करा कर उनकी शक्तियों का प्रदर्शन किया जा रहा है .ताकि विकृत हो चुकी प्रकृति अपने मूल स्वरुप में स्थापित हो सके...यह ''धरती की रक्षा'' के लिए अति अत्यावश्यक है..हमने आधुनिक बिज्ञान के वैज्ञानिको को अपने जगत अर्थात धरती की प्रकृति में विवस,बेबस ,पंगु और लाचार कर दिया है..अहंकार का समूल सर्वनाश कर देना मूल स्वभाव होने से, ब्यक्ति हो या देश उसके बिध्वंस की शुरुआत कर दी गयी है...जहाँ असुरो का साम्राज्य है.असुर स्वभाव से किया जाने वाला कृत्य है,असुर भाव है,उसका अंत कर देना बहुत ही जरूरी है.यह युग के अंत की शुरुआत है.सभी के लिए सावधानी जरूरी है.. यह आध्यात्म और शब्दों का मात्र बकवास और विलास नही है..किसी के मानने या न मानने का कोई ईन्तजार और गरज नही है. ''यह तो मेरे पिता श्री बिधाता परमात्मा शिव ''बाबा'' केदारनाथ जी का हिमालय से ब्रह्माण्डीय आदेश और इक्षा है ,आदेश है...'' ''हमने धरती के मूल ट्राइंगल को जाग्रत कर उसमे,उसकी अवस्था में परिवर्तन कर दिया है..और वर्तमान में उस ट्राइंगल में लगातार हो रहे बिस्फोट का परिणाम है आज का प्राकृतिक अनिश्चितता और प्राकृतिक तत्वों में हो रहा बिध्वंस.''' विश्व युद्ध नही, बल्कि भ्रस्ट और असुर स्वभाव के देशो में सारी धरती पर गृह युद्ध होगा...सरकार ही नही ब्यवस्था में परिवर्तन किया जा रहा है सारी धरती पर...सब कुछ आप सभी के सामने ही घटित हो रहा है और इन घटनाओं में तीव्रता बढती ही जाएगी.किसी के रोके किसी भी कीमत और उपाय पर रुकेगी नही... युग परिवर्तन और सामूहिक जगत में हो रहा प्राकृतिक बिध्वंस आज के आधुनिक वर्तमान और सभ्य जगत तथा समाज की मूल मांग है...इसकी पूर्ति परमात्मा ने करना प्रारंभ कर दिया है.इससे मानवों में दूषित सोच परमात्मा के प्रति शुद्ध होगा .क्योकि उसके सामने परिणाम जो होगा...यही पुरुस्कार का वक्त है अपने -अपने कर्मो का...सभी को उसके किये गये कर्मो के हिसाब से उसका हक सुनिश्चित रूप से वितरित किया जायेगा.... ''बाबा श्री बिधाता'' ने ''अपने जगत के बिधान में परिवर्तन कर दिया है''
अब संसार बिधाता के नये संशोधित बिधान के अनुसार चलने के लिए बाध्य है ।परिणाम भी आना प्रारंभ हो गया है.सभी अपने जीवन तथा सारे संसार जगत में घटित हो रही घटनाओ को देख कर समझ ले.
''बिधाता के परिवर्तित बिधान के अनुसार जगत में परिवर्तन का परिणाम दिखलाई पड़ने लगा है.''